pawan Bansalनई दिल्ली, 2 जुलाई. रेलवे घूसकांड में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने मंगलवार को दिल्ली के पटियाला कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किया। सीबीआई ने महेश कुमार, विजय सिंगला सहित 10 लोगों के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किया है। आरोप-पत्र में पूर्व रेल मंत्री पवन कुमार बंसल का नाम नहीं है।

सीबीआई सूत्रों ने बताया था कि एजेंसी ने मामले की अपनी जांच मुकम्मल कर ली है और आरोपितों के खिलाफ एकत्रित साक्ष्यों एवं उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों पर कानूनी सलाह पाने के लिए फाइल अभियोजन निदेशालय भेजी है। पहले आरोप पत्र में संभवत: बंसल को आरोपित के रूप में नामित नहीं किया जाएगा, लेकिन उनका जिक्र किया जा सकता है और उनकी जांच से उभरने वाले तथ्यों को भी आरोपपत्र की सामग्री में शामिल किया जा सकता है।

 

बताया कि एजेंसी बंसल की कथित भूमिका की अपनी जांच खुली रख सकती है और अगर वह धन के साथ उनका संबंध जोडऩे वाला साक्ष्य जमा कर पाई तो पूरक आरोपपत्र भी दाखिल किया जा सकता है। सीबीआई सूत्रों ने बताया कि इस मामले में जो साक्ष्य जमा किया गया है उसका एक बड़ा हिस्सा टैप की गई फोन वार्ता है। इसके अतिरिक्त सिंगला के दफ्तर और घर से बरामद की गई चीजें हैं। इसके साथ ही कारोबारी मंजूनाथ के वित्तीय लेनदेन हैं जो कथित रूप से इस घोटाले का बिचौलिया था।

मोदी और शाह का जिक्र नहीं!
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के महासचिव अमित शाह को विवादित इशरत जहां मुठभेड़ केस में फिलहाल राहत मिलती दिख रही है। सूत्रों के मुताबिक सीबीआई अपनी चार्जशीट में इन दोनों नेताओं का नाम शामिल नहीं कर रही है। ये चार्जशीट गुरुवार 4 जुलाई को गुजरात हाईकोर्ट में पेश की जानी है। इस मामले में विवादों में आए आईबी के स्पेशल डायरेक्टर राजेंद्र कुमार का नाम भी चार्जशीट में नहीं शामिल किए जाने की खबर है। सूत्रों के मुताबिक सीबीआई इस मामले में फूंक-फूंक कर कदम रखना चाहती है और नहीं चाहती की उसकी चार्जशीट को लेकर कोई विवाद खड़ा हो।

सीबीआई ने इशरत सहित 4 लोगों के एनकाउंटर में शामिल 8 पुलिस अधिकारियों के खिलाफ ही चार्जशीट दाखिल करने जा रही है। 2003 में गुजरात पुलिस ने फर्जी एनकाउंटर को अंजाम दिया था। इसे लेकर तमाम सवाल भी उठे। पहले तो गृह मंत्रालय ने इशरत और उसके साथियों को लश्कर के आतंकवादी बताया । लेकिन पी चिदंबरम के गृह मंत्री बनने के बाद अपना रुख बदलते हुए दूसरे हलफनामे में इससे इनकार कर दिया। इसके बाद गुजरात हाई कोर्ट ने सीबीआई को एनकाउंटर की सच्चाई पता लगाने का निर्देश दिया।

इस एनकाउंटर के दौरान राजेंद्र कुमार अहमदाबाद में आईबी के जवाइंट डायरेक्टर थे और उन्होंने ही अलर्ट दिया था कि चार आतंकी नरेंद्र मोदी की हत्या की कोशिश को अंजाम देने गुजरात आए हैं। फर्जी एनकाउंटर के लिए इसी अलर्ट को आधार बनाया गया। अब राजेंद्र पर आरोप लग रहे है कि उन्होंने गुजरात पुलिस के साथ मिलकर फर्जी एनकाउंटर की साजिश रची थी। इसे लेकर आईबी और सीबीआई आमने सामने हैं।

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