राज्य की सबसे बड़ी और धार्मिक सहाय की नदी तो नर्मदा ही है. राज्य की पावन नदियोंं मेंं क्षिप्रा कुंभ नदी होने के कारण वह देश की पावन-धार्मिक नदी भी है.

बड़ी नदियों में राज्य की बेतवा- तवा व चंबल नदियां आती हैं. एक अर्से तक चंबल को अभिशप्त नदी भी कहा गया क्योंकि यह बीहड़ों और डाकुओं का इलाका रही है.

अब वह ठप्पा इसके नाम से हट रहा है और यह विद्युत उत्पादन, सिंचाई, घडिय़ाल व डाल्फिन के अभ्यारण के रूप में पहचान में आ रही है. लेकिन चंबल कछार का एक भाग ऐसा भी है जो सूखाग्रस्त रहता है. लेकिन अब चंबल कछार के सूखा ग्रस्त क्षेत्र को नर्मदा नदी अपने कछार के पानी से हरा-भरा करेगी.

नर्मदा कछार से पानी उद्धहन सिंचाई (लिफ्ट इरीगेशन) से चंबल के सूखा ग्रस्त कछार को पानी से हरा कर देगी. राज्य की सिंचाई में यह बड़ी लाभ की योजना है. मालवा की जमीन बहुत उपजाऊ है और वहां सिंचाई की सुविधा हो जाए तो वह राष्ट्र के खाद्य भंडार को भरने में बहुत बड़ा योगदान है. नर्मदा नियंत्रण की बैठक में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में यह महती निर्णय लिया गया है.

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