नई दिल्ली. चने की पैदावार करने वाले प्रमुख राज्यों में हाल ही में हुई बरसात से हुए फसल को नुकसान तथा कम बुवाई क्षेत्र के कारण दो महिनों में चने की कीमत में 10 प्रतिशत की वृद्धि संभावित है. विदेशों मे चने के निर्यात को प्रतिबंधित करने के लिए खा़द्य मंत्री रामविलास पासवान ने आयात शुल्क लगाने का भरोसा दिए जाने तथा दालों के निर्यात को अनुमति दिए जाने से भी चने के भाव उपर चढऩे में समर्थन मिलेगा .

एक बार जब नई फसल की आवक स्थिर हो जाएगी तथा फसल की मात्रा के बारे में अंतिम जानकारी मिल जाएगी, चने की कीमतें निश्चित ही 4000 रूपए क्विंटल तक पहुंच जाएगी. लेकिन बुवाई क्षेत्र में भारी गिरावट के आधार पर उत्पादन के कम आकलित को देखते हुए इस पूरे साल चना स्थिर बना रहेगा . इस साल जनवरी से लेकर अब तक चने की कीमत में 5 प्रतिशत की गिरावट आई है और इस समय नेशनल कमोडिटी एण्ड डेरिवेटिव्ज एक्सचेंज

(एनसीडीईएक्स)पर अपै्रल डिलेवरी का व्यापार 3535 रूपये प्रति क्विंटल हुआ .
साल के अधिकांश समय में चने का व्यापार इसके 2013-14 के न्यूनतम समर्थन मूल्य 3100 रूपए प्रति क्विंटल से नीचे हुआ. 2013 में रिकार्ड उत्पादन, 2014 के आरंभ में कम मूल्य(रूपए के मुकाबले कमजोर डॉलर के कारण) ने बाजारों में चने का स्टॉक उ’च स्तर पर बनाए रखा. 2014 मे मानूसन के आने में हुई देरी ने कुछ हद तक बाजार के सेंंटिमेंटस को कुछ हद तक समर्थन प्रदान किया. लेकिन सरकार द्वारा जमाखोरों पर लगातार की गई कार्यवाहियों ने कीमतों को बढने से रोका. पैट्रोल/डीजल की कीमतों में लगातार गिरावट के साथ कुछ अंतराष्ट्रीय बाजारों में अ’छे उत्पादन ने भी रूख को कमजोर रखा.पिछले साल किसानों को लाभकारी मूल्य नहीं मिले जिसके पारिणामस्वरूप इस साल बुवाई क्षेत्र मे कमी आई. हाल ही में किए गए एक स्वतंत्र सर्वेक्षण ने रिपोर्ट दी है कि इस साल उत्पादन में 15 से लेकर 20 प्रतिशत तक की गिरावट आएगी जिससे कीमतों को स्थिर बने रहने मे समर्थन मिलेगा. जबकि निकट भविष्य मे सीजन की नई फसल आने के कारण चने की कीमतें नीचे बनी रहेंगी, कुछ समय बाद कीमतें निश्चित रूप से बढेंगी

सूत्रों के अनुसार जनवरी के मध्य मे हुई बरसात से देश के अन्य हिस्सों खासकर मध्य प्रदेश के अतिरिक्त राजस्थान मे कम से कम 4 से लेकर 5 प्रतिशत तक फसल को नुकसान पहुचने का अनुमान है. लेकिन, जैसे जैसे कटाई आगे बढेेगी वास्तविक नुकसान 8 से लेकर 9 प्रतिशत तक बढ जाएगा. बरसात ने खडी फसलो ंसे ‘यादा पकी हुई फसलो को नुकसान पहुंचाया क्योकि पौधे के विकास के दौरान दाने टूट कर गिर गए. 30 दिसम्बर को पासवान ने कहा था कि उनके मंत्रालय ने वाणि’य मंत्रालय को यह अनुशंसा की है कि गिरती कीमतों से स्थानीय किसानों के हितों की रक्षा करने के लिए दालों पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगा दे. पिछले एक साल में दाल की कीमतें कभी कभार सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य 3100 रूपए प्रति क्विंटल के नीचे गिरने के साथ मंद ही बनी रही. इसके साथ ही मंत्री ने दालो के निर्यात जिस पर कुछ सालो ंसे प्रतिबंध लगा था उसको अनुमति प्रदान करने की अनुशंसा भी की है .

कृषि मंत्रालय के अनुसार 6 फरवरी तक 2014-15 मे रबी दलहनों का बुवाई क्षेत्र पिछले साल इसी समय के बुवाई क्षेत्र 15.76 मिलियन से 9.30 प्रतिशत घटकर 14.29 मिलियन हो गया. पिछले साल इसी समय चने की बुवाई 10.05 मिलियन थी जो तेजी से 15.10 प्रतिशत घटकर 8.53 मिलियन हो गई है .

रेेलिगेर ब्रोकिंग के वाइस प्रेसिडेंट (रिटेल रिसर्च) अजितेश मलिक ने कहा कि 2014 में चने को 2500-2600 के स्तरों पर बहुत मजबूत समर्थन मिला था. कीमतें इन स्तरों से लगातार उछलती रही है. चने की उपरी कीमतें काफी समय से 3500-3600 को पार नहीं कर पायी है. फिर भी कम बुवाई, घरेलू मांग मे बढत, अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में स्टॉकिस्टस से मांग तथा स्थिरता से मार्च के बाद से नई फसल के आने तक पण्य के लिए कीमतें उपर की ओर चढेंगी.

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