मध्यप्रदेश की महिला राज्यपाल श्रीमती आनन्दीबेन नेे महिलाओं की स्वास्थ्य की सबसे बड़ी समस्या पर सरकार व समाज का ध्यान आकर्षित किया है. राजधानी के लक्ष्मीबाई कन्या महाविद्यालय के एक समारोह में उन्होंने कहा कि हर महाविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ साल में एक बार सभी छात्राओं का स्वास्थ्य विशेष रूप से खून की जांच कराना चाहिये.

इससे उनके शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा का पता लगने से कुपोषित होने से बचाया जा सकता है. हीमोग्लोबिन शरीर में खून की कमी की बीमारी है जिसे हम हमारे ऐसे भोजन से दूर कर सकते हैं जिसमेें सभी प्रकार के पोषण तत्व हों. शरीर में रक्त अल्पता से कई बीमारियां जन्म लेती हैं.

महिलाओं में रक्त अल्पता आमतौर पर पायी जाने वाली गंभीर बीमारी है. प्रसव के समय और कई बच्चों को जन्म देने से यह बीमारी घातक रूप धारण कर लेती है. इसका इलाज महिला को अनेकों बीमारी से बचा सकता है. अब महिलायें सभी क्षेत्रों में आगे आ गयी हैं और उनके प्रसवकाल के समय और सामान्य रूप से रक्त की कमी से बचाया जाना चाहिये.

जिससे उनकी कार्यक्षमता प्रभावित न हो. श्रीमती आनन्दीबेन ने कहा कि आज महिलाओं में जागरुकता बढ़ी है. भ्रूण हत्या में काफी कमी आ रही है उससे ऐसा लगता है कि अगली जनगणना में महिलाओं की संख्या पुरुषों के बराबर हो जायेगी. स्कूलों व कालेजों में हाईजीन व स्वास्थ्य को अनिवार्य विषय बना दिया जाना चाहिये ताकि उनमें स्वयं खानपान कैसा रखा जाए इसके प्रति आत्म ज्ञान व रुचि पैदा हो जायेगी.

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