केन्द्रीय शिक्षा मंडल के पेपर लीक होने से देश के 28 लाख छात्र और उनसे भी ज्यादा उनके पालक अकारण ही बढ़ते तनाव में आ गए. इस कांड की परत-दर-परत और खुलती ही जा रही है. शासन और मंत्रियों की बातें घिसे-पिटे नारों से ज्यादा कुछ भी तथ्यपूर्ण नहीं हैं. हर मामले में हमेशा की तरह यह कहा जा रहा है कि निष्पक्ष जांच होगी, दोषियों को बख्शा नहीं जायेगा और कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी.

जबकि होगा वही कि उन पर मामले दंड विधान की किस धारा के तहत चलाये और साबित हुए. पूरा राष्ट्र दिल्ली के निर्भया कांड में यह देख चुका है पूरा देश मांग कर रहा था कि उन 6 अपराधियों को फांसी दी जाए. सरकार भी सख्त सजा दिलाने की बात कहती रही और हुआ यह कि उन 6 में से जो सबसे जघन्य अपराधी था उसे कानून में तीन साल से ज्यादा सजा देने का प्रावधान ही नहीं था.

संसद इस मामले में कानून में संशोधन करना चाहती थी वह संसद के अवरोधों के होते समय पर हो नहीं पाया. महिला व सामाजिक संगठनों ने रात में भी सुप्रीम कोर्ट की बैठक करवा ली कि वह जघन्य अपराधी छोड़ा न जाए लेकिन कानून में प्रावधान नहीं था और सब बैठे रह गये और उस जघन्य अपराधी को छोडऩा पड़ा. इसलिये मंत्रियो की इस बात में कोई दम नहीं होता कि सख्त से सख्त कार्यवाही करेंगे.

मोबाइल एस.एम.एस., फैक्स और वाट्सएप के जमाने में जो पेपर लीक हुए हैं वे पूरे देश में पहुंच चुके होंगे और खूब बिके होंगे. दिल्ली से ही खबर आ गयी कि पेपर 35,000 रुपयों तक बिके. कई छात्रों को उपलब्ध थे.

इस वक्त केंद्र सरकार छात्रों व उनके पालकों की परेशानियों से ज्यादा खुद अपने बचाव में लग गयी है कि सिर्फ दो पेपर ही लीक हुए हैं और बात दिल्ली तक ही सीमित रही. इसलिये एक हफ्ते में इन दोनों पेपर की फिर से परीक्षा कराके नुकसान और प्रतिष्ठा हानि की भरपाई कर ली जायेगी जबकि उत्तेजित छात्रों का कहना है कि या तो पूरी परीक्षा फिर से ली जाए या इन दोनों पेपर की भी फिर से परीक्षा न ली जाए.

उनका यह भी कहना है कि सिर्फ दो पेपर ही नहीं बल्कि परीक्षा के सभी पेपर लीक हुए हैं. छात्रों व पालकों की इस बात में दम है कि आज के सूचना क्रांति के युग में यह दो पेपर न तो केवल दिल्ली तक सीमित रहे बल्कि यह देशव्यापी घपला है.

मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल के पहले दिन से ही काला धन पर ‘जुमला’ घोटाला से अपना शासन प्रारंभ किया. अब तक सबसे बड़ा बैंक घोटाला चल ही रहा है कि जाते-जाते शिक्षा के क्षेत्र में पेपर लीक का घोटाला हो गया.

श्री मोदी ने अपनी ‘मन की बात’ में छात्रों को परीक्षा के कई टिप्स दिये थे कि वे परीक्षाओं में किस मानसिकता के साथ जायें लेकिन उसमें उन्होंने यह नहीं बताया था कि ‘पेपर लीक’ हो जाए तो वे और उनके पालक क्या करें. मेडिकल क्षेत्रों में कहा जा रहा है कि पेपर लीक घोटाले से छात्रों में स्ट्रेस स्तर 70-80 प्रतिशत तक बढ़ गया है.

कभी-कभी ऊंचा बोलना भी नीचा दिखा जाता है. मोदी सरकार अभी तक यह दम भरती रही कि उसके कार्यकाल में कोई घपला-घोटाला नहीं हुआ. अब सामने यह आ रहा है कि बैंकों का घोटाला अब तक का सबसे बड़ा घोटाला है और पेपर लीक का तो शिक्षा का अखिल भारतीय सबसे बड़ा घोटाला हो गया. जुमला फार्मूला भी उनकी स्थिति को कठिन बना चुका है.

पेपर लीक में छापे पड़ रहे- लोगों से पूछताछ हो रही है. जरूरत इस बात की है कि सबसे पहले छात्रों की पूछताछ हो उन्हें इस तनाव से मुक्त किया जाये.

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