भोपाल,

इस संग्रहालय के विकास में वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग किया गया, यह संग्रहालय सभी विषयों में शोध हेतु शिक्षा का केंद्र है. भारतीय ग्रा्रमीण संस्कृति का विलक्षण रूप यहां देखने को मिला. यहां आकर सभी विद्यार्र्थियों ने विषय अनुरूप शोध कार्य पूरा किया.

यह बात इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में यूनाइटेड वल्र्ड इंस्टिट्यूट ऑफ डिजाइन, अहमदाबाद के सेकंड सेमेस्टर डिजाइन के विद्यार्थियों के संग्रहालय भ्रमण में यूनाइटेड वल्र्ड इंस्टिट्यूट ऑफ डिजाइन, अहमदाबाद के प्रो. विजय पूनिया ने कही.

कार्यक्रम के प्रारंभ में संग्रहालय के अधिकारी डॉ. सूर्य कुमार पांडे ने सभी छात्र-छात्राओं को संग्रहालय के महत्व के बारे में बताया. तत्पश्चात संग्रहालय का परिचयात्मक फिल्म का प्रदर्शन किया गया.

इसके बाद गाथा डॉट कॉम के निदेशक व संस्थापक सुमरिन पंड्या ने कहा कि यह संग्रहालय पूरे भारत की संस्कृति का अक्षुण भंडार है, उन्होने गुजरात के रबारी जनजाती के भूंगा का उदाहरण देते हुए कहा कि हमें संस्कृति को संग्रहालय के परिपेक्ष्य में ही न देखें बल्कि इसे उस क्षेत्र में ही संरक्षित करने हेतु वहां के लोगों को इनकी महत्ता के बारे में जागरूक कर संस्कृति के विविध पक्षों को सटिक एवं सरल शब्दों में वर्तमान तकनीकी का उपयोग करते हुए जानकारी उपलब्ध करानी होगी.

इस अवसर पर संग्रहालय के निदेशक, प्रो. सरित कुमार चौधुरी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उत्तर पूर्वीय राज्यो में शिक्षा के क्षेत्र में और संग्रहालय द्वारा क्षेत्रीय समुदाय के सहयोग से खोले गए व्याख्या केंद्र के बारे में बताया.

दिखा ग्रामीण संस्कृति का विलक्षण रूप

द असम वैली स्कूल ,शोनितपुर असम से 34 सदस्यीय दल द्वारा राज्य संग्रहालय का भ्रमण किया गया, विधार्थियों ने पूरा सग्रहांलय घूमकर विभिन्न वीथिकाओं के बारे में गहराई से जाना.

विधार्थियों व असम से आये दल प्रमुख डा.निधि सिग ने संग्रहालय के सदस्य नम्रता यादव, इंद्रपाल यादव से पृृथक-पृथक वीथीकाओ पर कला शिल्पों की जानकारी ली, विद्यार्थियों मे कौतूहल इन बातो को लेकर रहा की, भारत व भारत के बाहर प्राचीन समय मे भी व्यापार व आचार-विचारों का आदान प्रदान हो रहा. संग्रहालय कीपर ने उत्खनित वीथीका मे पुरावशेषों पर विधार्थियों को पूरी जानकारी दी.

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