न सिर्फ हाल ही में उठे पंजाब नेशनल बैंक में 1500 हजार करोड़ घोटाला या इससे पूर्व के विजय माल्या घोटाला या बिहार में दबा दिया सृजन घोटाला सब में कुछ समय तक काफी हो-हल्ला ही मचता है और लंबी जांचों में सब भूला बिसरा हो जाता है. कुछ छोटे अधिकारियों को पकड़ा जाता है और सस्पेंड कर दिया जाता है और बाद में वे कब कैसे बहाल हो जाते हैं उसका भी कहीं कुछ पत नहीं चलता.

बैंकों में लंबे चौड़े घोटाले छोटे अधिकारी स्तर पर हो ही नहीं सकते. इसमें न सिर्फ नामी गिरामी उद्योगपति, बैंकों के उच्च अधिकारी बल्कि राजनेता भी लिप्त रहते हैं. हर घोटाला कार्यवाही या सजा में परिवर्तित नहीं होता है- लगभग सभी में परम्परागत लीपापोती हो जाती है.

पंजाब नेशनल बैंक के घोटाले में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और संचार मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद सरकार की ओर से सफाई दे रहे हैं- जिनके विभाग का बैंक और वित्त से कुछ लेना-देना नहीं है और न ही मंत्रालय स्तर पर उनके सामने यह मामला कभी आया होगा. कांग्रेस अध्यक्ष श्री राहुल गांधी हैरान हैं कि वे मंत्री बोल रहे हैं जिनका इससे कोई ताल्लुक नहीं है और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली चुप्पी साधे बैठे हैं.

श्री जेटली का वित्त मंत्रालय अपनी जिम्मेवारी से भाग कर इस कांड में जिम्मेवारी घोटाला कर रहा है. वित्त मंत्रालय ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से पूछा है कि अब तक कैसे पंजाब नेशनल बैंक का घोटाला उनकी नजर में नहीं आया और यह कांड हो गया. हैरानी इस बात की है कि सभी सरकारी बैंक केंद्र का वित्त मंत्रालय ही चलाता है वही इन बैंकों के डायरेक्टर नियुक्त करता है. इसमें रिजर्व बैंक की प्रत्यक्ष हस्तक्षेप या देखरेख की जिम्मेवारी नहीं होती है वह काम केन्द्रीय वित्त मंत्रालय का ही होता है.

वह अपनी जिम्मेवारी निभा नहीं पाया और अपनी गैर जिम्मेवारी का ठीकरा रिजर्व बैंक के सिर फोड़ रहा है. इस कांड में इलाहाबाद बैंक भी फंस गया है. इसके एक डायरेक्टर श्री देवेन्द्र अवस्थी ने इसमें घोटाला भांप लिया था और गंभीर आपत्ति दर्ज की थी. लेकिन केन्द्रीय वित्त मंत्रालय ने कार्यवाही यह की थी कि श्री अवस्थी से डायरेक्टर पद से इस्तीफा ले लिया और नीरव मोदी की हिमायत की थी.

इसके साथ ही दिल्ली के गीतांजलि ज्वेलर्स के उच्च अधिकारी ने पद से इस्तीफा देकर सरकार को इस मामले में जानकारी दी थी. दो ज्वेलर्स शोरूम नें प्रधानमंत्री कार्यालय को भी बताया कि यहां भारी घपला लग रहा है.

मोदी ने उन्हें नकली व घटिया ज्वेलरी दी है- शिकायत पर बदलने के लिए वापस ले ली लेकिन उसके बदले में कुछ नहीं दिया. उसने लोगों को नकली हीरे बेचे और नेताओं को महंगे सोना-हीरा के गिफ्ट दिये हैं. एक शो रूम मालिक के खिलाफ मेहुल चौकसी ने घपला उजागर करने पर झूठी रिपोर्ट दर्ज करायी.

एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट ने यह पाया कि वह रिपोर्ट झूठी है और घपला उजागर करने के कारण उसे परेशान करने के लिए है. रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय में भी की गयी और वहां से कहा कि उनकी रिपोर्ट बंद कर दी गयी है क्योंकि उसमें कोई तथ्य नहीं है.

स्विट्जरलैंड के दाभोस में नीरव मोदी ग्रुप फोटो में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ग्रुप में हैं. इसके बारे में कहा जा रहा है कि वह वहां आ गया होगा उसका प्रधानमंत्री से कोई संबंध नहीं है. लेकिन यह सभी जानते हैं कि प्रधानंमत्री के साथ ग्रुप फोटो में यह पहले तय रहता है कि उसमें कौन लोग होंगे और फ्रंट लाइन में कौन बैठेगा और पिछली लाइनों में कौन किस स्थान पर खड़ा होगा.

ऐसा कभी भी कही नहीं होता कि कोई भी व्यक्ति आकर प्रधानमंत्री के ग्रुप फोटो में आकर खड़ा हो जाए. ये सभी घपले बैंकों और उद्योगपतियों तक सीमित नहीं हो सकते हैं. ये ‘ऊपर’ तक है. इस समय सभी जिम्मेवारी से बच रहे है और दूसरों पर थोपने के प्रयास में लगे हैं.

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