हिन्दू महासभा प्रदेश भर में आज से धरना प्रदर्शन करेगी

ग्वालियर ,  ग्वालियर में दौलतगंज स्थित हिन्दू महासभा कार्यालय में लगाई गई महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे की मूर्ति को आज शाम जिला प्रशासन ने कार्यालय पहुंच कर कमरे का ताला तोड़कर मूर्ति को हटवा कर उसे अपने कब्जे में ले लिया.

उधर हिन्दू महासभा कल बुधवार से पूरे प्रदेश में मूर्ति हटाने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेगी. जिला प्रशासन ने मूर्ति मामले में हिन्दू महासभा को एक नोटिस देकर हटाने की मांग की थी. आज जिला प्रशासन के अल्टीमेटम का अंतिम दिन था.

वहीं आज दोपहर में हिन्दू महासभा नेता राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. जयवीर भारद्वाज जिला प्रशासन को अपना जबाब देने जब एडीएम शिवराज वर्मा के पास पहुंचे तो उन्होंने उनसे कहा कि उनके जबाब को कलेक्टर राहुल जैन सुनेंगे.

तब तक वह वहीं बैठे रहे और उसके बाद लगभग तीन बजे कलेक्टर ने उन्हें एक घंटे का नोटिस दिया वहीं जब तक वह दौलत गंज स्थित अपने कार्यालय पहुंचते उससे पहले ही जिला प्रशासन पुलिस के साथ दौलतगंज स्थित कार्यालय पहुुंचे और मूर्ति को हटाकर उसे अपने कब्जे में लेकर कोतवाली थाने में रखवा दिया.

इस दौरान कुछ हिन्दू महासभाईयों ने जिला प्रशासन के विरोध में नारेबाजी की, पुलिस ने हिन्दू महासभा नेता जयवीर भारद्वाज के भतीजे कमल भारद्वाज को अपनी हिरासत में ले लिया. उधर आज जहां प्रशासन ने अपना अल्टीमेटम दिया था वहीं कांग्रेस ने भी मूर्ति को कार्यालय पहुंच कर तोडने की बात कही. इसे देखते हुए तनाव की स्थिति देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल दौलतगंज स्थित हिन्दू महासभा कार्यालय में तैनात था.

मूर्ति के हटने के बाद कुछ कांग्रेस कार्यकर्ता स्कूटर पर जश्न मनाते हुए निकले.उधर हिन्दू महासभा नेता जयवीर भारद्वाज ने शाम को पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि जिला प्रशासन ने उन्हें उनके नोटिस का जबाब तक नहीं लिया.

उससे पहले ही ब्रिटिश सरकार की तरह एक घंटे का अल्टीमेटम दिया. वह जब तक अपने कार्यालय पहुंचे उससे पहले ही पता चला कि मूर्ति को जिला प्रशासन ने हटाकर अपने कब्जे में ले लिया और उस कमरे को सील कर दिया जिसमें मूर्ति स्थापित की गई थी.

उन्होंने बताया कि वह कल से पूरे प्रदेश में धरना प्रर्दशन करेगी वहीं न्यायालय में भी जाएगी. इसके लिए राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कैलाश नारायण शर्मा को न्यायालयीन कार्रवाई का जिम्मा सौंपा गया है. उन्होंने बताया कि वहीं हिन्दू महासभा के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश सुंगंधी और प्रदेश महामंत्री जितेन्द्र सिंह ठाकुर को भी प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी है.

उल्लेखनीय है कि गत 15 नवंबर को नाथूराम गोडसे की मूर्ति की स्थापना हिन्दू महासभा कार्यालय में की गई थी. उसके बाद से जहां कांग्रेस ने विरोध प्रर्दशन करना शुरू कर दिए थे वहीं हिन्दू महासभा भी कार्यालय पहुंचने की कांग्रेस की धमकी के बाद से सतर्क थी.

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे को 15 नवंबर 1949 में अंबाला कोर्ट में फांसी दी गई थी. बताया जाता है कि नाथूराम गोडसे ने जिस पिस्टल से महात्मा गांधी की हत्या की थी वह तत्कालीन सिंधिया रियासत के सेना के एक अधिकारी ने दी थी.

उल्लेखनीय है कि नाथू राम गोडसे का जन्म महाराष्ट्र के बारामती में हुआ था. जन्म के समय नाथूराम गोडसे का नाम रामचन्द्र था. गोडसे ने ही अपने साथियों के साथ दिल्ली में जाकर महात्मा गांधी की हत्या करने की योजना बनाई थी. वह हथियार लेने ग्वालियर आए .

जहां उनकी मुलाकात हिन्दूमहासभा से जुडे डॉ. दत्तात्रेय परचुरे से हुई और डॉ. परचुरे ने ही सिंधिया रियासत के एक अधिकारी से मिलकर हथियार का प्रबंध करवाया था. डॉ. परचुरे के परिचित गंगाधर दंडवते ने जगदीश गोयल की पिस्टल का सौदा पांच सौ रूपए में कराया था.

पिस्टल खरीदने के बाद दस दिन नाथूराम गोडसे ग्वालियर में रहे उन्होंने यहां रहकर पिस्टल चलाने का अभ्यास किया था. इसी पिस्टल से 30 जनवरी 1948 में महात्मा गांधी की हत्या कर दी गई थी. ज्ञातव्य है कि उस समय हथियार खरीदने के लिए लायसेंस की जरूरत नहीं होती थी.

बताया जाता है कि 1942 के दूसरे विश्वयुद्ध के समय ग्वालियर के सैनिकों की टुकडी लेफ्टिनेंट जनरल वीबी जोशी के नेतृत्व में अबीसीनिया में तैनात थी. मुसोलिनी की सेना के एक दस्ते ने इस टुकडी के सामने हथियारों सहित समर्पण कर दिया था.

इन्ही हथियारों में इटालियन दस्ते के अधिकारी 1934 में बनी 9 एमएम की बरेटा पिस्टल भी थी. इसे लेफ्टिनेंट जनरल ने अपने पास रख लिया था. इसे बाद में जगदीश गोयल ने जोशी के वारिसों से खरीद लिया था.

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