मध्यप्रदेश में जीएसटी इंटेलिजेंस विंग के पहले और बड़े छापे ने ढोल में पोल कुछ यूं उजागर की कि पता चला कि करोड़ों की कर चोरी चाकलेट जैसे व्यापार में की जा रही है. यह तो हांडी का चावल भर है, कर चोटी की पूरी हांडी की छानबीन की जाए तो मध्यप्रदेश में सभी क्षेत्रों में यह आंकड़ा चौंकाने वाला साबित हो सकता है.

सेंट्रल एक्साइज और कस्टम विभाग के तहत आने वाले जीएसटी इंटेलिजेंस विंग ने बच्चों के लिये चाकलेट-टाफी आदि बनाने वाली फैक्ट्रियों पर इंदौर, भोपाल, पीथमपुर सहित एक साथ चार राज्यों के प्रमुख शहरों में छापामारी की.

इंदौर के ही एक समूह पर की गई छापामारी में यह चौंकाने वाला बिन्दु उजागर हुआ कि ढाई सौ करोड़ के कारोबार को 20 गुना कम दिखाकर बड़े पैमाने पर कर चोरी की जा रही थी. इसका खुलासा पीथमपुर की एक फैक्ट्री पर छापा मारने से प्रारंभ हुआ था. बड़े पैमाने पर नंबर दो में कारोबार किया जा रहा हैं.

जांच में इस बात का खुलासा है कि कारोबार के हर चरण में कच्चे बिलों का उपयोग कर बड़े पैमाने पर कर चोरी की जा रही है. इसका उदाहरण यूं दिया जा रहा है कि चाकलेट बनाने के लिये शकर, पेकेजिंग, बोरी खरीदी किसी का भी हिसाब नहीं दिया जा रहा है.

इन कारोबारियों के राजनेताओं से भी धनिष्ठ संबंधों का उल्लेख सामने आ रहा है. यह कर चोरी पकड़े जाने का मामला एक मिसाल की तरह उपयोग में लाकर इस तरह बड़े पैमाने पर की जा रही अन्य कारोबार की कर चोरियों को भी कड़ी कार्रवाई कर रोका जाना चाहिए.

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