नई दिल्ली. आर्थिक तरक्की के लिए माहौल अच्छा हो गया है और इकोनॉमी का सबसे खराब दौर बीत चुका है, ये बात सरकार ने इकोनॉमिक सर्वे 2014-15 के जरिए कही है, जहां सरकार ने दहाई अंकों की ग्रोथ हासिल का लक्ष्य रखा है.
सरकार ने आर्थिक सर्वेक्षण 2014-15 लोकसभा में पेश कर दिया है. आर्थिक सर्वेक्षण में वित्त वर्ष 2016 में देश की जीडीपी ग्रोथ 8 फीसदी से ज्यादा रहने की उम्मीद जताई गई है. वित्त वर्ष 2016 में कृषि सेक्टर की ग्रोथ 4 फीसदी के लक्ष्य से कम रहने की आशंका है.

आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि सरकार वित्तीय घाटा कम करने के लिए प्रतिबद्ध है. वित्त वर्ष 2015 में देश की जीडीपी ग्रोथ 7.4 फीसदी रहने का अनुमान है. वहीं वित्त वर्ष 2016 में देश की जीडीपी ग्रोथ 8.5 फीसदी रहने का अनुमान है. सरकार ने 10 फीसदी से ज्यादा की जीडीपी ग्रोथ का भी भरोसा जताया है.
वित्त वर्ष 2015 में कृषि ग्रोथ घटने की आशंका है और ये 1.1 फीसदी रहने का अनुमान है. लेकिन मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेस में तेजी की उम्मीद है. वित्त वर्ष 2015 में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ 6.8 फीसदी रहने का अनुमान है. वहीं वित्त वर्ष 2015 में सर्विसेस सेक्टर की ग्रोथ 9.1 फीसदी से बढ़कर 10.6 फीसदी होने का अनुमान है.

वित्त वर्ष 2016 तक करेंट अकाउंट घाटा 1 फीसदी तक आने की उम्मीद है. वहीं वित्त वर्ष 2015 में करेंट अकाउंट घाटा 1.3 फीसदी रहने का अनुमान है. वित्त वर्ष 2016 में रिटेल महंगाई दर 5-5.5 फीसदी रहने का अनुमान है. सरकार ने वित्त वर्ष 2015 में 4.1 फीसदी के वित्तीय घाटे के लक्ष्य हासिल करने का भरोसा जताया है. सरकार को स्पेक्ट्रम और कोल ब्लॉक बेचने से बड़ी आमदनी की उम्मीद है, लेकिन ग्लोबल डिमांड में कमी से आगे चुनौती बनी रहेगी.
सरकार ने भरोसा जताया है कि इकोनॉमी का सबसे बुरा दौर बीत चुका है और बड़े सुधारों का रास्ता साफ होने का भरोसा जताया है. सरकार के मुताबिक आर्थिक तरक्की के लिए माहौल अच्छा नजर आ रहा है.

सरकार ने भरोसा जताया कि वित्त वर्ष 2017 से जीएसटी लागू होने के बाद ग्रोथ में शानदार बढ़ोतरी देखने को मिलेगी. रेलवे में पब्लिक निवेश से आय में सुधार की उम्मीद है और पीपीपी मॉडल में सुधार की जरूरत है. वित्त वर्ष 2015 में कुछ खर्चों में कटौती संभव है और महंगाई दर में ज्यादा तेजी की उम्मीद नहीं है. सब्सिडी का फायदा उच्च वर्ग के लोगों को ज्यादा मिल रहा है, लिहाजा सब्सिडी में सुधार की जरूरत है.

फल-सब्जियों को एपीएमसी एक्ट से बाहर करने की मांग की गई है. सरकार को भरोसा है कि जीएसटी और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर स्कीम गेम चेंजर साबित होगी. सर्विस सेक्टर के लिए कुछ नियमों में बदलाव जरूरी है. अप्रैल-दिसंबर में महंगाई दर में गिरावट रही लेकिन खराब मॉनसून और महंगे क्रूड से मंहगाई बढऩे का डर है. बैंकिंग और इंश्योरेंस सेक्टर में बड़े रिफॉर्म होंगे. वित्त वर्ष 2015 में खाद्य सब्सिडी 1.08 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है.
कमर्शियल बैंकों के ग्रॉस एनपीए में बढ़त देखने को मिली है, लेकिन फिस्कल कंसोलिडेशन पर सरकार का जोर रहेगा. सब्सिडी रिफॉर्म से सरकारी खर्चों में कमी आएगी. कच्चे तेल में गिरावट से इंपोर्ट बिल कम होगा, लेकिन एक्सपोर्ट ग्रोथ में धीमापन चिंता का विषय है. वित्तीय घाटा कम करने के लिए खर्च में कटौती जरूरी है.

सब्सिडी पहुंचाने के लिए मोबाईल और पोस्ट ऑफिस नेटवर्क का इस्तेमाल हो सकता है. प्रोजेक्ट रुकने की तादाद पिछले 3 तिमाही से स्थिर हुई है और रुके प्रोजेक्ट की संख्या 8.3 फीसदी से घटकर 7 फीसदी हो गई है. छोटी अवधि में निवेश बढ़ाने का जिम्मा सरकार को उठाना होगा.

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