बैतूल जिले में चैन्नई-दिल्ल्ली एक्सप्रेस ट्रेन में रात को तीन बजे जो डकैती हुई है उसे डकैती नहीं बल्कि डकैतों का डकैती ऑपरेशन कहना ही उपयुक्त होगा. उन्होंने इसकी पूरी योजना को जिस तरह अंजाम दिया वह आपरेशन ही है.

बैतूल-इटारसी सेक्शन के काला आखर के स्टेशन मास्टर ने दो कोचों के बीच में बैठे कुछ संदिग्ध लोगों को देखा और अगले पोलापत्थर के स्टेशन मास्टर को सूचित किया. यहां ट्रेन को रोककर स्टेशन मास्टर और ट्रेन गार्ड वहां पहुंचे तो डकैतों ने उन पर पत्थरों से हमला कर भाग कर किसी दूसरे डिब्बे में चले गये.

बाद में ट्रेन तो अगले स्टेशन बरबटपुर की तरफ बढ़ाया गया. डकैतों ने बरबटपुर और घोड़ाडोंगरी के बीच ट्रेन का प्रेशर पाइप काट उसे बीच जंगल में रोक लिया. जहां रोका गया वह जगह भी उनकी तय की हुई थी वहां डकैत ट्रेन पर पथराव कर रहे थे जिससे कोई उतर न सके और अंदर डकैतों ने महिला यात्रियों को लूट लिया.

पूरे 40 मिनिट तक आपरेशन चला न तो इस बीच वहां कोई रेलवे पुलिस नहीं आयी. या तो ट्रेन में सुरक्षा पुलिस नहीं थी या पत्थरों की मार से वे बाहर नहीं आये. जब ट्रेनों में ऐसे डकैती आपरेशन होने लगें तो यही कहना पड़ेगा कि रेलवे में सुुरक्षा व्यवस्था है ही नहीं.

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