भारत की राजधानी दिल्ली से नेपाल की राजधानी काठमांडू तक दोनों देशों के करार के अनुसार रेल लिंक 2022 तक पांच सालों में कायम हो जायेगा. चीन भी काठमांडू तक उसका रेल लिंक स्थापित कर रहा है. आने वाले समय में काठमांडू तीन देशों- भारत, चीन और नेपाल का अंतराष्ट्रीय रेल जंक्शन होने जा रहा है.

नेपाल के नये प्रधानमंत्री श्री के.पी. शर्मा ओली भारत की राजकीय यात्रा पर आये हुए हैं और दोनों देशों के बीच कई करार हो रहे हैं. नेपाल भौगोलिक दृष्टिï से भारत से तीन ओर पूर्व दक्षिण व दक्षिण में भारत के राज्यों सिक्किम, बिहार, उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड से घिरा है और उसकी उत्तरी पूरी सीमा चीन से लगती है.

सांस्कृतिक रूप से नेपाल हिन्दू राष्ट्र है और अधिकांश नेपाल में नौकरी करने या बसने आ चुके हैं. उसी तरह भारत में वहां सीमावर्ती राज्यों मेंं कई सदियों पूर्व भारत मूल के लोग भी जाकर बस गये हैं और उन्हें मधेशी कहा जाता है. नेपाल का उत्तरी भाग पहाड़ी नेपाल और दक्षिणी भाग मैदानी इलाका है. इसी मैदानी इलाके में अधिकांश आबादी मधेशी हैं.

इन्हें वहां के संविधान में मूल नेपाली नागरिक न मानते हुए दूसरे दर्जे का माना जाता है. यही वहां नेपाल में आंतरिक वर्ग संघर्ष और उग्र आंदोलन बना हुआ है. हाल ही में मधेशियों ने वहां भारत से आयात की सप्लाई रोक दी और पूरे नेपाल में लगभग सभी वस्तुओं का भारी अभाव हो गया है. नेपाल का पूरा जनजीवन भारत से किये गये आयात व निर्यात पर ही चलता है.

मधेशी आंदोलन में भारत की भूमिका नहीं थी वह उनका आपसी मामला है. लेकिन भारतीय मूल के माने जाने के कारण वहां भारत विरोधी भावना पनप जाती है. नेपाल ने मधेशी आंदोलन से आयात ठप्प होते चीन की तरफ रुख किया और चीन ने उसे कुछ सामान भेजा और वह करार भी हो गया कि दोनों देश रेलवे लिंक बनायेगा ताकि नेपाल को केवल भारत पर निर्भर न रहना पड़े. वहां यह धारणा पनपना भारत के हित में नहीं है. साथ ही नेपाल ने भी यह महसूस किया. चीन से आयात करना उसकी रुचि का नहीं हो सकता.

नेपाल की यह राजनैतिक बाध्यता हो गयी है कि वह दोनों देशों से सामंजस्य बना कर ही चल सकता है. लेकिन यह भी जानता कि नेपाल को दोनों देशों की प्रतिस्पर्धा का भी क्षेत्र नहीं बनाया जा सकता. चीन नेपाल रेल लाने का काम 2016 को ही शुरू कर चुका है. वह उसे तिब्बत के रास्ते रेल से जोड़ रहा है और इस पर कार्य शुरू हो चुका है.

भारत की सेना में एक गोरखा बटालियन भी है. भारत रक्षा व व्यापार में नेपाल से सहयोग करेगा. नेपाल के प्रधानमंत्री श्री ओली ने भारत-नेपाल बिजनेस फोरम में भारतीय उद्योग जगत का आव्हान किया कि ये नेपाल में आकर उद्योग स्थापित करें. नेपाल सरकार का आर्थिक दृष्टिकोण यह है कि वह 2030 तक नेपाल मध्य आय का देश बना दे.

नेपाल में राजनैतिक अस्थिरता का काफी लंबा दौर चला. 50 के दशक में वहां राणाशाही का कब्जा था और नेपाल के राजा सपरिवार भाग कर भारत में कई वर्षों तक शरण लेकर रहे थे. भारत ने ही उनकी मदद की. वहां राणाशाही का अंत हुआ.

राजशाही दौर में कोइराला परिवार और उनकी पार्टी नेपाली कांग्रेस ने वहां संसदीय प्रजातंत्र लागू किया लेकिन राजशाही ने उसे खत्म कर केवल राजा का शासन चलाया लेकिन यहां की जनता ने कुछ वर्ष पूर्व वहां से राजतंत्र ही खत्म कर दिया. वहां से गणतंत्रीय लोकतंत्र कायम है. अब वहां राष्ट्रपति होता है. लेकिन उस देश की सबसे बड़ी राजनैतिक कमी यह है कि वे अभी तक सर्वमान्य संविधान नहीं बन पाया और उसमें सालों से उलझा रहा है.

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