विश्व का 9 वां अजूबा बुधेला का वीणा वादिनी विद्यालय

धीरेन्द्र धर द्विवेदी
सिंगरौली,

हम आपको ऐसे हुनर से परिचित कराने जा रहे हैं, जिसकी कल्पना आपने कभी नहीं की होगी. यह हुनर देख आप कह उठेंगे अद्भुत, अकल्पनीय और अविश्वसनीय हैं, भले ही यह हुनर देश में चर्चा का विषय अभी नहीं बन पाया हो पर इसके कायल विदेशी जरूर हैं वे इसे विश्व का 9 वां अजूबा कहते हैं.

जी हां हम यहां बात कर रहे हैं देश की ऊर्जाधानी सिंगरौली मप्र के छोटे से गांव बुधेला के वीणा वादिनी पब्लिक स्कूल की. जहां सीएम मंत्रालय से टीम आयी थी और 20 अपै्रल के बाद भोपाल में विद्यालय के छात्रों व प्राचार्य का बुलावा आ सकता है.

दरअसल देश की ऊर्जाधानी सिंगरौली मप्र के छोटे से गांव बुधेला के वीणा वादिनी पब्लिक स्कूल की है जहां वर्तमान में विद्यालय में अध्ययनरत करीबे दो सौ बच्चे दोनों हाथ से एक साथ लिखने की कला में पारंगत हो चुके हैं. कम्प्यूटर के की बोर्ड से भी तेज रफ्तार से उनकी कलम चलती है.

जिस कार्य को सामान्य बच्चे आधे घंटे में पूरा कर पाते उसे वह मिनटों में निपटा देते हैं, दिमाग और नजरों से इतने मजबूत हैं की दोनों हाथ से हिन्दी, अंग्रेजी या उर्दू रोमन अर्थात दो भाषाओं में एक साथ लिखकर हैरत में डाल देते हैं.

जबकि ऊर्जाधानी का यह गांव पहाड़ों से घिरा है. कोयले के अकूत भंडार के बाद भी इलाके का पिछड़ापन देखकर अच्छी शिक्षा की कल्पना नहीं की जा सकती है. गरीबी से जकड़े इस इलाके में मेधा का यह भंडार आश्चर्य में डालने वाला है, स्कूल में कक्षा 1 से 8 तक की पढ़ाई होती है.

नन्हें हाथ देवनागरी लिपि, उर्दू, स्पेनिस, रोमन, अंग्रेजी सहित छह भाषाओं में लिखते हैं. दोनों हाथों से लिखने का कम्पटीशन होता है जिसमे ये बच्चे 1 घंटे में 24000 शब्द लिखने की क्षमता रखते हैं.

असल में यहां कोई जादू जैसा कुछ नहीं है हां जादू है अगर तो अभ्यास का इसे अभ्यास का ही जादू कहेंगे कि जिन प्राथमिक क्लास में पढऩे वाले बच्चों को सही तरीके से शब्दों का उच्चारण करना तक भी नहीं आता है, लेकिन ऐसे बच्चे 100 तक का टेबल मुह जवानी याद हैं. इधर रविवार को कलेक्टर अनुराग चौधरी ने स्कूल के प्राचार्य व संचालक व बच्चों को सम्मानित भी किया है.

जेनिस रोज ने माना है दुनिया का 9 वां अजूबा : लायंस क्लब के अंतर्राष्ट्रीय चेयरमैन जेनिस रोज 2004-05 में बुधेला गांव अमेरीका से अपने जापानी मित्रों के साथ पहुंचे थे. तीन दिन रहने के बाद बच्चों को अपने साथ बनारस ले गए थे. जहां एक समारोह में इन बच्चों के हुनर को दिखाया गया.

समारोह को संबोधित करते हुए जेनिस रोज ने कहा था कि भारत में दुनिया का यह 9वां अजूबा है. वहीं विद्यालय के प्राचार्य विरंगत शर्मा के अनुसार जर्मनी,कनाडा, वाशिंगटन जैसे विदेशों से फोन आ चुका है. श्री शर्मा के अनुसार अगस्त महीने में जर्मनी से 14 सदस्यीय टीम आयेगी.

प्रथम राष्ट्रपति से मिली प्रेरणा

देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ.राजेन्द्र प्रसाद दोनों हाथ से लिखते थे. ऐसा कैसे हो सकता है इस जिज्ञासा ने विद्यालय की नींव रखने की प्रेरणा दी. खुद प्रयास किया, लेकिन अधिक सफल नहीं हुए तो बच्चों पर प्रयोग आजमाया जो सीखने में अव्वल निकले.

अब सभी छात्रों की दोनों हाथ से एक साथ लिखने की कला विशेषज्ञता बन गई है वीरंगत शर्मा को विद्यालय के संचालन के दौरान पता चला कि नालंदा विश्वविद्यालय के छात्र औसतन प्रतिदिन 32000 शब्द लिखने की क्षमता रखते थे. इस पर पहले भरोसा करना कठिन था लेकिन इतिहास को खंगाला तो कई जगह इसका उल्लेख मिला. इसी से सीख लेकर बच्चों की लेखन क्षमता बढ़ाने का प्रयास शुरु किया और अब आलम यह है कि 1 घंटे में बच्चे 24 हजार शब्द लिख डालते हैं.

Related Posts: