कालखण्ड विशेष के दो नाटकों का प्रदर्शन

भोपाल,

रवीन्द्र भवन में आयोजित थिएटर ओलम्पिक्स की श्रृंखला में थिएटरवाला दिल्ली के नाटक की प्रस्तुति की गई. इस नाटक में एक युवक और युवती के प्रेम का चित्रण है.

चारुदत्त और वसंतसेना की कहानी अनेक अवसरों पर वरिष्ठ रंगकर्मियों की निगाह से गुजरी है और मंच पर आयी है. यह नाटक प्रेमियों के पाखण्डपूर्ण हावभाव और संसार को दीन-हीन और अपेक्षाकृत अपरिपक्व मानने के भ्रम पर केन्द्रित है जिसमें अनेक हास्य प्रसंग प्रस्तुत होते हैं.

निर्देशक का कहना है कि वे भास के प्रेम आधारित कृतित्व को मंच पर प्रस्तुत करने में अधिक रुचि लेते हैं. यह उनके लिए रचनात्मक सहजता का विषय है. उनका कहना है कि यदि जीवन में स्वार्थ के स्थान पर करुणा हो तो जीना जटिल न होगा. आषाढ़ का एक दिन नाटक आमतौर पर मंचन के लिए दुरूह माना जाता है.

प्राय: यह निर्देशकों के लिए जितनी चुनौती रहा है उतनी ही अभिनेताओं के लिए भी फिर भी इसका मंचन जब जब होता है कौतूहल और दिलचस्पी का विषय होता है. मोहन राकेश की इस चर्चित कृति को इस बार मंचन के लिए बापी बोस लेकर आये जो कि नाटक के निर्देशक हैं.

यह नाटक कवि कालिदास और मल्लिका के प्रेम पर आधारित है जिसमें मल्लिका की माँ का विरोधाभास है. निर्देशक का कहना है कि मेरे लिए यह प्रेम के यथार्थ के पुनराविष्कार की एक समकालीन समझ को व्यक्त करने वाला अवसर था.

Related Posts: