भोपाल,

थियेटर ओलंपिक आयोजन के अवसर पर आज शाम भारत भवन में हिंदी नाटक बैरिस्टर पर्वतीशम तथा रवींद्र भवन में हिंदी नाटक रुस्तम ओ सोहराब का मंचन हुआ. अपने अपने विषयों के साथ दोनों ही नाटकों को देखना दिलचस्प अनुभव था. बैरिस्टर पार्वतीशम मोककटी नरसिंह शास्त्री का लिखा तथा महेश घोडेश्वर द्वारा अनुदित किया नाटक था., इसका निर्देशन शिव प्रसाद तुनु ने किया था.

प्रयोग अब जयपुर की इस प्रस्तुति में हम ऐसे नायक की कथा देखते हैं जो आंध्र प्रदेश का निवासी है. वह बैरिस्टर बनना चाहता है. एक बार उसने बिपिन चंद्र पाल का भाषण सुना था तब से उसे इस बात की लगन लगी.

वास्तविक स्थिति यह है कि वह आर्थिक रूप से विपन्न है तथा उसके पास इतना भी धन नहीं है कि वह दो समय खाना खा सके. अपनी इच्छा पूरी करने के लिए वह घर छोड़ देता है लेकिन जिस तरह संघर्षों से जूझता है उसको समझने की बजाए लोगों में वह उपहास का पात्र बन जाता है लेकिन उसका संघर्ष उसका जुझारूपन उसे उसके सोच में सफलता दिलाने के काम आता है.

नाटक तेलुगु साहित्य के प्रसिद्ध उपन्यास पर आधारित है. शुभ सत्तू शिव प्रसाद राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के स्नातक रहे हैं. उन्होंने यह एक महत्वपूर्ण विषय उठाकर एक अच्छा नाटक तैयार किया है. इस नाटक में शीर्षक भूमिका निभाने वाले कलाकार और सहायक कलाकारों की भूमिकाएं सराहनीय है . नाटक दृश्य बंद और अभिनय की कसावट से प्रभावित करता है.

रवीन्द्र भवन में हुआ नाटक का मंचन

रवीन्द्र भवन में मंचित नाटक रुस्तम ओ सोहराब भी जयपुर की संस्था द्वारा प्रस्तुत किया गया था. उर्दू एवं हिंदी मिश्रित भाषा में यह नाटक अपने चर्चित विषय एवं तथ्य के कारण बहुत लोकप्रिय रहा है तथा अलग-अलग समय में अनेक निर्देशकों ने इसका मंचन किया है. यह आगा हश्र कश्मीरी की रचना है इसका निर्देशन इम्तियाज अहमद और ऋषिकेश शर्मा ने किया था. नाटक रुस्तम और सोहराब की प्रसिद्ध कथा पर आधारित है.

रुस्तम एक ईरानी सेना का सेनापति है और सोहराब रुस्तम का बेटा. दोनों अपने अपने समय में बहादुरी में किसी से कम नहीं, लेकिन एक समय वह भी आता है जब दोनों को एक दूसरे से युद्ध करना होता है. परिणाम अकल्पनीय है.इस नाटक में रुस्तम बने महेश कुमार जिलोवा तथा सोहराब की भूमिका में विकास पारीक प्रभावित करते हैं.

अन्य कलाकारों में अन्नपूर्णा शर्मा, साक्षी शर्मा, गगन मिश्रा, हेमंत गौतम, सौरव भट्ट, यतिन राठौर , अक्षय आदि की भूमिकाएं रेखांकित किए जाने योग्य हैं. इस नाटक को देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित थे.

 

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