उड़ान सीरियल की चकोर मीरा देवस्थले की नवभारत से चर्चा

नवभारत न्यूज ग्वालियर,

नाटक व्यक्ति के जीवन को राह दिखाने की प्रेरणा देता है जिंदगी भी किसी नाटक से कम नहीं है हम जो भी कुछ नाटकों के माध्यम से दिखाते है उसमें कहीं न कहीं जीवन जीने का सार या जीवन में घटी हुई घटनाओं के आधार पर नाटकों को बनाया जाता है और उड़ान नाटक भी बंधुआ मजदूरी पर आधारित है यह बात नवभारत से चर्चा करते हुए कलर्स चैनल पर चल रहे धारावाहिक उड़ान में चकोर का किरदार निभा रही मीरा देवस्थले ने कही।

कलर्स चेनल पर चर्चित धारावाहिक उड़ान में एक बंधुआ मजदूरी के किरदार में भूमिका निभा रही मीरा देवस्थले(चकोर)ने नाटक के माध्यम से संदेश देते हुए बताया कि गांव-गांव में किस तरह बंधुआ मजदूर बनाकर लोगों को प्रताडि़त किया जाता है जो जिंदगीभर के लिए गांव के मुखिया एवं बजूददार लोगों के गुलाम बनकर रहते है। यह गांव के बच्चे किसी बंधुआ मजदूर से कम नहीं है आज समय है कि ऐसे बच्चों को मुक्त कराना होगा।

देवस्थले ने कहा कि असंभव कुछ भी नहीं होता मैंने कभी भी जिंदगी में हार नहीं मानी जो भी काम किया वह लक्ष्य निर्धारित करते हुए हौंसलें बुलुंद कर हर उड़ान को पूरा किया है. जिंदगी में किसी लक्ष्य को प्राप्त करना है तो सबसे पहले अपनी इच्छा शक्ति मजबूत करनी होगी।

उन्होंने बताया कि मैंने जो भी सीरियलों में अभिनय निभाया है उसमें चाहे ससुराल सिमर का हो या दिल्ली वाली ठाकुर गर्ल व उड़ान कहीं न कहीं समाज के लिए संदेश अवश्य दिया है।

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