अब यह तो कहा नहीं जाना चाहिए कि बैंकों में करोड़ों के घोटाले बढ़ते जा रहे हैं बल्कि यह ज्यादा उपयुक्त है कि लगातार हो चुके घोटाले बैंकों से निकलते आ रहे हैं. रिजर्व बैंक ने सभी बैंकों को निर्देश दिया है कि यह जानकारी दें कि उनके बैंक में कितना कर्जा एनपीए (न लौटाया जा रहा) है और इनकी वसूली अभी तक क्यों नहीं हो सकी.

अब यह भी स्पष्ट है कि ये घोटाले बैंकों के साथ नहीं किये गये हैं बल्कि बैंकों में ही बड़े अधिकारियों ने व्यापार जगत के बड़े घपलेबाजों से मिलकर किये हैं. इनके कर्जों के सभी दस्तावेज यहीं बैंक अधिकारी दबाये बैठे थे. उन्हें उनकी वसूली करनी ही नहीं थी.

पंजाब नेशनल बैंक की मुम्बई शाखा के एक अधिकारी शेट्टी का तबादला हुआ और नये अफसर ने शेट्टी द्वारा किये गये घपलों को उजागर किया. इसी के साथ बैंकों में घपलों का ‘पेन्डरा बाक्स’ खुल गया और अब एक के बाद एक निकलते जा रहे हैं और यह सिलसिला काफी समय तक जारी रहेगा.

बैंकों में डिफाल्टर इसलिये बढ़े कि वहां का अधिकारी वर्ग बड़े पैमाने पर संगठित अपराध के रूप में भ्रष्टाचारियों से भर गया है. अब एक और घोटाला उजागर हुआ है. तमिलनाडु की राजधानी चैन्नई में एक ज्वेलर कनिष्क गोल्ड प्राइवेट लिमिटेड ने स्टेट बैंक सहित 14 बैंकों से 824 करोड़ रुपयों की धोखाधड़ी कर दी.

बैंकों का ब्याज मिलाकर यह रकम 1000 करोड़ रुपयों से भी ज्यादा हो रही है. इसे सबसे ज्यादा कर्जा स्टेट बैंक ने 240 करोड़ रुपयों का दिया है. इस कम्पनी का मालिक भूपेश जैन और उसकी पत्नी भी विदेश भाग चुके हैं और उनके सभी संस्थानों पर ताले लगे हैं. इनके भागने में भी बैंकों के लिप्त अफसरों का हाथ प्रतीत हो रहा है ताकि मामला इनके ढूंढने पकडऩे में लंबा खिंचता जाए और वे निर्णायक कार्यवाही से बचे रहें.

सीबीआई को भी मामले उस समय सौंपे जा रहे हैं जब कर्जदारों को बैंकों द्वारा देश के बाहर बचाकर भेज दिया गया है.सी.बी.आई. की मुसीबत यह है कि जो लोग भाग गये हैं उन्हें देश में लाने के विदेशों में प्रत्यार्पण (सौंप देने की) की कार्यवाही करनी पड़ती है जिसमें बरसों लग जाते हैं.

इसमें प्रत्यर्पण का काम इतना खास हो जाता है कि घोटाला का मामला बिना आगे किसी कार्यवाही के दबा पड़ा रहता है. विजय माल्या-किंग फिशर के मामले इन दिनों यही चल रहा है और वर्षों अदालती कार्यवाही में उलझा रहेगा. यही बैंकों के भ्रष्टï अधिकारी और घपलेबाज ज्वैलर्स चाहते हैं.

पंजाब नेशनल बैंक में हुए घोटाले में यह जानकारी भी आ गई है कि पंजाब नेशनल बैंक में लिप्त अफसरों ने विदेशों में जायदाद खरीद ली है और वहीं उनके बैंक एकाउंट भी हैं. इन्हीं घपलों के संदर्भ में यह बात भी जोरों से उठाई जा रही है कि सभी सरकारी बैंकों का फिर से निजीकरण कर दिया जाए.

इनका राष्ट्रीयकरण प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने किया था. उससे पहले बैंक बड़े-बड़े नगरों व बड़े उद्योग-धंधों तक सीमित थे. राष्ट्रीयकरण के बाद ही बैंक सभी जगह सभी लोगों तक पहुंच पाये हैं.

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