नीरव और चौकसी को ईडी का समन, 2 बैंक अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर

  • महाप्रबंधक सहित 18 कर्मचारियों पर गिरी गाज
  • इंटरपोल से मांगी मदद ,11 राज्यों में 35 ठिकानों पर छापे

नई दिल्ली,

पीएनबी फ्रॉड मामले में जांच एजेंसियों ने पीएनबी के दो अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है.

गोकुलनाथ शेट्टी और मनोज हेमंत करात नाम के इन अधिकारियों पर आरोपी कंपनी के साथ मिलीभगत कर पीएनबी के साथ 4,857 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है. आरोप है कि इन दोनों ने भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं के पक्ष में अनधिकृत और नकली पत्र जारी किए और आरोपी कंपनियों के विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के पक्ष में कथित क्रेडिट लेटर जारी किए. सूत्रों का कहना है कि जांच एजेंसियां पीएनबी के दोनों आरोपी अधिकारियों से पूछताछ कर रही हैं.

वहीं इससे पहले ईडी ने नीरव मोदी के खिलाफ एक और केस दर्ज किया है. सूत्रों का कहना है कि प्रवर्तन निदेशालय ने नीरव मोदी और मेहुल चौकसी को 23 फरवरी को ईडी के मुंबई स्थित दफ्तर में पेश होने के लिए समन किया है. वहीं शुक्रवार को नीरव मोदी के 11 राज्यों में स्थित 35 ठिकानों पर भी ईडी ने छापा मारा है.

बताया जा रहा है कि छापेमारी कार्रवाई में ईडी ने 549 करोड़ रुपये के हीरे और सोना बरामद किया है. इस तरह गुरुवार और शुक्रवार को मारे गए छापे में कुल 5649 करोड़ रुपये की 29 अचल संपत्ति जब्त की गई हैं. वहीं नीरव मोदी के हेड ऑफिस को निर्देश दिया है कि कंपनी के न्यू यॉर्क, लंदन, मकाऊ और पेइचिंग ऑफिस में कोई भी खरीद या बिक्री नहीं होनी चाहिए.

कंपनी बेचकर चुकाऊंगा बैंकों का पैसा: नीरव

मुंबई. दुर्लभ हीरों के अंतरराष्ट्रीय कारोबारी नीरव मोदी की ओर से बैंकों का बकाया चुकाने का दिया गया आश्वासन किसी के गले नहीं उतर रहा है. अनुभवी बैंकरों का कहना है कि फर्जीवाड़ा करनेवाले सभी लोग ऐसी ही चाल चलते हैं. मुश्किल में फंसे अरबपतियों का इस तरह का आश्वासन देना आम बात है. नीरव मोदी ने एक पत्र के जरिए सभी बैंकों का बकाया चुकाने का भरोसा दिलाया है.

4 दिन में डूबे 15000 करोड़

कोई फ्रॉड जितना बड़ा हो उसका असर उससे बहुत बड़ा होता है. पंजाब नैशनल बैंक के ताजा उदाहरण से इसे समझा जा सकता है. इस मामले में 11,300 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े का पता चला तो इससे प्रभावित लोगों और संस्थानों के 15,000 करोड़ रुपये डूब गए. ऐसा उन कंपनियों या बैंकों के मार्केट कैप में गिरावट की वजह से हुआ जो किसी-न-किसी तरह से इस मामले से जुड़े हैं.

2011 से 2018 तक 22600 करोड़ का चूना

भारतीय प्रबंधन संस्थान बेंगलुरु के अध्ययन में पता चला है कि देश के सरकारी बैंकों को 2012 से 2016 के बीच फर्जीवाड़े से कुल 227.43 अरब रुपये का चूना लग चुका है. उधर, सूचना-तकनीकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आरबीआई के आंकड़ों का हवाला देते हुए संसद को बताया था कि 1 जनवरी से 21 दिसंबर 2017 तक 179 करोड़ रुपये के बैंक फर्जीवाड़े के 25,800 से ज्यादा मामले सामने आए.

यूपीए के दौर से चला आ रहा घोटाला

  • आवाज उठाने पर देना पड़ा इस्तीफा

सबसे बड़े बैंक घोटाले की परतें खुलने लगी हैं और एक के बाद एक चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं. गीतांजलि ग्रुप को गलत तरीके से लोन देने के खिलाफ आवाज उठाने वाले इलाहाबाद बैंक के पूर्व डायरेक्टर ने दावा किया है कि यह घोटाला यूपीए सरकार के दौर से चला आ रहा है और एनडीए सरकार में कई गुना अधिक बढ़ गया. बैंक के पूर्व डायरेक्टर दिनेश दुबे ने कहा, मैंने गीतांजलि जेम्स के खिलाफ 2013 में सरकार और आरबीआई को डिसेन्ट नोट भेजा था पर मुझे आदेश दिया गया था कि इस लोन को अप्रूव करना है. मुझ पर दबाव डाला गया और मैंने इस्तीफा दे दिया

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