कल्पना कीजिए ऐसे उपकरणों की , जो सीधे हवा से अपने आप बिजली खींच लें. ठीक वैसे ही जैसे सोलर सेल्स सूरज की रोशनी को खींच लेते हैं. यही नहीं इस बिजली का इस्तेमाल घर को रोशन करने से लेकर इलेक्ट्रिक कार को चार्ज करने पर भी किया जा सके. इसी तरह जरा सोचिए ऐसे पैनल के बारे में जो आपकी बिल्डिंग की छत के ऊपर लगे हों और बिजली पैदा होने से पहले ही उन्हें रोक दें.

हैना ये काफी अजीब बातें? पर ऐसे ही उपकरणों को बनाने में जुटे वैज्ञानिकों ने वाकई इस ओर काफी कामयाबी पाई है. साइंस डेली के मुताबिक, 240वीं नैशनल मीटिंग ऑफ अमेरिकन केमिकल सोसायटी में पेश की गई रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञानिक ऐसी डिवाइसों को बनाने के शुरुआती स्तर पर आ चुके हैं.
स्टडी के लीडर फर्नांडो गेलमबेक, पीएचडी के मुताबिक, हमारी रिसर्च ऐसा रास्ता खोल सकती है जिसमें वातावरण से बिजली लेकर भविष्य में उसका वैकल्पिक ऊर्जा के स्त्रोत के रूप में इस्तेमाल किया जा सके.
यह रिसर्च 200 साल पुरानी उस वैज्ञानिक गुत्थी को भी सुलझा सकती है जो इस बारे में है कि वायुमंडल में बिजली किस तरह बनती और खत्म होती है.
फर्नांडो के मुताबिक, सोलर एनर्जी जिस तरह कुछ परिवारों को बिजली के बिल से छुटकारा दिलाती है उसी तरह बिजली का यह नया सोर्स भी इसी तरह की बचत करा सकता है.
फर्नांडो के मुताबिक, अगर हमें पता लग जाए कि वायुमंडल में बिजली किस तरह बनती और फैलती है तो हम बिजली गिरने से होने वाली मौतों और नुकसान को रोक सकते हैं. बिजली गिरने से दुनिया भर में लाखों मौतें और असंख्य घायल होते हैं. इससे लाखों डॉलर की प्रॉपर्टी का नुकसान होता है.
एक समय वैज्ञानिक मानते थे कि वायुमंडल में पानी की बूंदों पर बिजली का चार्ज नहीं होता. यह धूल और दूसरे दव्यों के चार्ज्ड कणों के आने पर भी ये न्यूट्रल ही रहती हैं. पर नए सबूत बताते हैं कि यह गलत है. पानी की बूंदे वातावरण में मौजूद बिजली को अपने अंदर समेट लेती हैं.
फर्नांडो और उनके कलीग्स ने इस विचार को पुख्ता करने के लिए लैब एक्सपेरिमेंट किए.
इसमें हवा में धूल कणों के साथ पानी का संपर्क कराया गया.इस परीक्षण से उन्हें पता लगा कि वातावरण में मौजूद पानी बिजली इक_ा कर लेता है और जो भी चीज उसके संपर्क में आती है उसमें उसे ट्रांसफर कर देता है.
फर्नांडो के मुताबिक, हम इसे हाइग्रोइलेक्ट्रिसिटी यानी ह्यूमिडिटी इलेक्ट्रिसिटी का नाम दे रहे हैं.
भविष्य में हम ऐसे कलेक्टर्स बना सकते हैं जो सोलर सेल्स की तरह (सूरज की रोशनी को इकट्टा  करके बिजली बनाना) हाइग्रो इलेक्ट्रिसिटी को इकट्टा  कर लें और उसे घर व दफ्तरों तक पहुंचा दें.

Related Posts: