मध्यप्रदेश में शिक्षक आन्दोलन लगभग स्थाई हो गया था. हाल ही में उन्होंने ‘सिर मुंडाओ’ आन्दोलन भी चलाया. चुनाव का साल आया और हमेशा से यह देखने में आया कि चुनावी साल में लोगों की मांगें तोहफे में दी जाती हैं कि वे चुनाव में सरकार में चल रही पार्टी को वोट देंगे. आंगनबाड़ी कर्मचारियों को ऐसी ही प्राप्ति हो गई.

अब पंचायत सचिवों को भी बढ़ा वेतनमान देकर उन्हें भी गदगद कर दिया है. नई नियुक्ति का ही वेतन 10 हजार कर दिया गया है. अभी तक आंगनबाड़ी कायकर्ता, शिक्षक व पंचायत सचिव सघन कार्य व सेवा के बाद भी बड़े उपेक्षित रहे.

वे अद्र्धशासकीय और नियमित सेवा के लाभों से वंचित रहे. शिक्षा का अधिकार तो देश में लागू कर दिया और उसके बाद भी सभी जगह स्कूल नहीं बने, शिक्षकों के हजारों पद आज भी खाली पड़े हैं.

भाजपा सरकारों ने रोजगार देने व बढ़ाने की घोषणा तो खूब की. अब मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को यह और कर देना चाहिए कि चुनाव से पहले शिक्षकों के जितने भी पद खाली पड़े हैं उन सभी पदों पर शिक्षकों की भर्ती कर दी जाए.

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