आखिरकार ऊंट पहाड़ के नीचे आ ही गया. पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने पाक के आतंकवाद और आतंकवादियों की गिरफ्त में होने तथा पड़ोसी भारत में उन्हें भेजकर मारकाट करने की स्वीकारोक्ति कर ही ली. मुंबई हमले में पाक का हाथ होने को स्वीकार करने से भारत के दावे को विश्व मंच पर और बल मिला है. इससे यह भी सिद्ध हो ही जाता है कि भारत और कश्मीर में खून खराबे के लिए सिर्फ और सिर्फ पाक की सरकार- सेना तथा आतंकवादी ही जिम्मेदार हैं.

मुंबई हमले में पाक की संलिप्तता को अब, जबकि नवाज शरीफ अपने ही देश में चारों ओर से घिर चुके हैं, जिसे बेबाकी से स्वीकार किया है. विश्व की महाशक्तियों- अमेरिका और चीन के कान खोलने के लिये काफी कुछ है. मुंबई हमले के लिए 2008  में पाकिस्तान से ही नाव में सवार होकर 10 आतंकी आए थे और उन्होंने मुंबई में काफी तबाही मचाई थी.

इस हमले में अमेरिका, इजराइल सहित भारत के करीब 166 लोग काल-कवलित हुए थे तथा 300 से ज्यादा घायल हुए थे. इस हमले ने भारत सहित कई देशों को भी झकझोर दिया था. इस हमले में पाक की संलिप्तता को 2008 से ही पाकिस्तान नकारता आ रहा था. अब इस स्वीकारोक्ति से पाक का चेहरा विश्व के सामने बेनकाब हो गया है.

भारत तो शुरु से ही कहता रहा है कि पाक अपने देश में आतंकियों को पाल रहा है, उनके लिए शिविर चला रहा है, उनका पोषक बना हुआ है. लेकिन वहां की सरकार और सरकार की ‘आका’ वहां की सेना भी यह मानने को तैयार नहीं रही. संभव है शरीफ के इस बयान के बाद पाक आर्मी चीफ और सेना इसका खंडन करने में देर न करे! पर अब कुछ होने से रहा, तीर तो कमान से निकल चुका है.

शरीफ का यह कथन भी बेहद अहम है कि आप (पाक) एक देश को नहीं चला सकते, जबकि वहां दो या तीन सरकारें चल रही हों! इसके पीछे भी उनका आशय एक चुनी हुई सरकार, दूसरी सेना और तीसरी आतंकवादियों की समानांतर सत्ता से ही है. यह शरीफ ने इसलिए कहा क्योंकि प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने इसे झेला है, सहा है.

पूर्व में अमेरिका के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने भी कहा था कि पाक सेना के कुछ अधिकारी आतंकवादियों और आतंकी संगठनों को प्रशिक्षण देते हैं. दुर्दांत आतंकी ओसामा बिन लादेन इसका उदाहरण है. मुंबई हमले के एकमात्र गिरफ्तार आतंकी कसाब ने भी ऐसी ही स्वीकारोक्ति की थी. यहां यह भी उल्लेखनीय है कि पाक सरकार ने हाल ही में मुंबई हमलों की जांच से जुड़े एक अधिकारी को यह कहते हुए हटा दिया था कि वह सरकार की नहीं सुन रहे थे.

भारत में पाकिस्तान से आए आतंकी एक ओर तो कश्मीर में खून-खराबा किए हुए ही हैं, वहीं देश में नेटवर्क बनाने में भी जुटे हैं. इस पर भी पाकिस्तान ने भारत पर ही दोष मढ़ा है, जबकि वहां गिरफ्तार कई पाकिस्तानी आतंकियों ने पाक में प्रशिक्षण प्राप्त करने की बात मानी है. पाक का आतंकी सरगना मसूद अजहर का भतीजा भी यहीं सेना ने मार गिराया था.

बहरहाल, नवाज शरीफ का पाक पर बयान भारत के लिए तो अहम् है ही, विश्व मंच के लिए और ज्यादा महत्वपूर्ण है, क्योंकि कुछ देश अभी तक इसे मानने को तैयार नहीं थे. शायद आगे भी मानें या न मानें किन्तु चीन और अमेरिका को इस दिशा में कुछ ठोस कदम उठाने ही होंगे.

ज्ञात हो कि चीन पाक सीमा से लगे प्रांत में ऐसे ही आतंक और आतंकवादियों से त्रस्त है, वहीं अमेरिका में भी छिटपुट घटनाएं इसका आभास कराती रही हैं. विश्व को अब इस दिशा में गंभीरता से सोचना होगा कि कोई भी देश आतंकवादियों का पोषक न बनने पाए.

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