सांसद की नहीं दिख रही ग्रामीण क्षेत्रों में दिलचस्पी

बैरसिया,

भोपाल लोकसभा क्षेत्र के सांसद आलोक संजर का ससंदीय क्षेत्र बैरसिया में कम आना उनकी मुसीबत के साथ साथ पार्टी के लिए भी मुसीबत का कारण बनता जा रहा है.

क्षेत्र की जनता पार्टी से कम लेकिन सांसद से अधिक खफा दिखाई देने लगी है. जहां ग्राम ललरिया, बबचिया, नायसमन्द धर्मरा, बुदोर, गड़ा, सुकलिया, कुल्हौर, डुगरिया, रमपुरा सहित आधा सैकड़ा गांवों में सांसद के प्रति जनता में खुली नाराजगी सामने आने लगी है.

गुरू के नकशे कदम पर चेला: लोग सांसद संजर के नहीं आने के पीछे तरह तरह के तर्क देते सुने जाने लगे हैं. लोग कहते हैं कि क्षेत्र से पूर्व में संजर के राजनैतिक गुरु पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी लोकसभा का चुनाव लड़े थे तब कांग्रेस पार्टी के स्थानीय नेता पूर्व सांसद सुरेंद्र सिंह ठाकुर के मुकाबले करीब 10 हजार वोटों से बैरसिया विधान सभा से सुरेंद्र सिंह ठाकुर से पीछे रह गए थे.

हालांकि उस समय चुनाव जोशी ही जीते गए थे. उसी समय से जोशी भी बैरसिया के मतदाताओं को खास तवज्जो नहीं देते थे. सांसद संजर भी उनके ही चेले माने जाते हैं. इस कारण उन्होंने भी वही रवैया अपना रखा है.

यही धारणा क्षेत्र के मतदाताओं के मन में धीरे धीरे बीते तीन सालों में घर कर चुकी है. और सांसद ने भी अपनी जीत के बाद इस क्षेत्र का विकास तो छोड़ो क्षेत्र के कार्यकर्ताओं, पुराने नेताओ व पत्रकारों सहित आमजनों से दूरी बना कोई खास लगाव नहीं रखा है. लोग कहते हैं कि जिन मतदाताओं के वोटों की दम पर दिल्ली लोक सभा की चौखट तक पहुचे संजर उन्हीं को भूल चुके हैं.

इस बात का दूसरा उदाहरण उस समय जनता के सामने आया जब सांसद को क्षेत्र की एक ग्राम पंचायत का विकास के लिए बिजली, पानी शिक्षा, सडक़ आदि अपनी सांसद निधि से गोद ले कर विकास कराने की बात सामने आई तो पहले उन्होंने ग्राम पंचायत कुल्हौर को चुना.

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