अंदर मुख्यमंत्री और गृह मंत्री कर रहे थे महिला अपराधों की समीक्षा

भोपाल, म.प्र. में भले ही महिलाओं की सुरक्षा के लिये सरकार प्रतिबद्धता जताती है, लेकिन जानकर हैरानी होगी कि पुलिस मुख्यालय में दो महिला कांस्टिबल न्याय की गुहार लगाती रही और उसे अनसुना कर दिया गया.

यह वाक्या तब दिखाई दिया जबकि अंदर मुख्यमंत्री शिवराज ङ्क्षसह चौहान गृह मंत्री भूपेंद्र ङ्क्षसह के साथ महिला अपराध को नियंत्रित का संदेश देते हुये संवेदनशीलता का पाठ पढ़ा रहे थे.

इसमें गंभीर बात यह है कि यह दोनों ही महिला पुलिस आरक्षक किसी और से नहीं बल्कि पुलिस विभाग के अफसरों के शोषण का शिकार हैं.

इनमें से पहली महिला पीएचक्यूडी शाखा में पदस्थ है. यह पहले भी जहांगीराबाद पुलिस थाना शाखा के ही एएसपी के खिलाफ यौन शोषण का आरोप लगाते हुये एफआईआर दर्ज करा चुकी है. आरोपी पर कार्रवाई के लिये यह मुख्यमंत्री और गृह मंत्री से मिलना चाह रही थी.

वहीं दूसरी भोपाल सीआईडी में डीएसपी के पद पर पदस्थ पवन मिश्रा पर आरोप लगा रही थी कि वह पिछले 12 वर्षों से शादी का झांसा देकर यौन शोषण कर रहे हैं.

इतना ही नहीं, बिटिया के नाम के साथ पिता के स्थान पर नाम दर्ज है. अब यह अपनी पत्नी और साले के साथ मिलकर जान से मारने की धमकी दे रहे हैं. इस मामले में पुलिस ने कोई कार्यवाही नहीं की. बावजूद इसके ड्ïयूटी में तैनात अफसरों ने नहीं मिलने दिया.

यह बात अलग है कि बैठक खत्म होने के बाद शिवराज ने कहा कि जो मिलने आता है, उससे मिलते हैं जबकि गृह मंत्री से अलग बुलाकर चर्चा की जायेगी. लेकिन न्याय मिलेगा या नहीं, इस मामले में सभी की चुप्पी ही सामने आई है.

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