ईपीएस समन्वय समिति ने लगाया आरोप

भोपाल,

ईपीएस 1995 में भविष्य निधि के करोड़ों अंशदाताओं और पेंशनभोगियों का पिछले 22 वर्षों से शोषण एवं अन्याय हो रहा है. ईपीएस 1995 के पूर्व फेमिली पेंशन स्कीम 1971 प्रचलन में थी.

इस योजना में कर्मचारी के वेतन से 1.16 प्रतिशत, नियोक्ता अंशदान 1.16 प्रतिशत था. केंद्र सरकार भी इसमें 1.16 प्रतिशत अंशदान करती थी. इस योजना में कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के बाद कोई राशि नहीं मिलती परंतु मृत्यु होने पर उसकी पत्नी को रुपये 200/- प्रतिमाह पेंशन दी जाती थी. पिछले 47 वर्षों में केंद्र सरकार ने पेंशन योजना में अपना अंशदान नहीं बढ़ाया. इस योजना को दायित्व एवं सम्पत्तियों के साथ ईपीएस 1995 में मर्ज कर दिया गया.

योजना के प्रारंभ में न्यूनतम पेंशन रुपये 500 प्रतिमाह एवं अधिकतम पेंशन 1750 रुपये निर्धारित की गई थी. पिछले 22 वर्षों में सिर्फ एक बार योजना का पुनरीक्षण किया गया. केंद्र सरकार द्वारा 19 अगस्त 2014 के राजपत्र में पेंशनधारकों को न्यूनतम रुपये 1000 प्रतिमाह देने की अधिसूचना प्रकाशित की गई. वर्तमान में ईपीएस 1995 के अंतर्गत पेंशनभोगियों की संख्या लगभग 54 लाख है.

पेंशन योग्य वेतन सीमा 1995 में रु. 5000 एवं 2001 से 6500 रखी थी. वर्तमान में सितंबर 2014 से पेंशन योग्य वेतन की सीमा रु. 6500 को बढ़ाकर राशि रुपये 15000 निर्धारित की गई है. परिणाम स्वरूप प्रत्येक कर्मचारी द्वारा प्रतिमाह 1250 रु. अंशदान पेंशन फंड में किया जाता है. अंशदान में उपरोक्तानुसार समय-समय पर की गई वृद्धि के उपरांत भी कर्मचारियों को पुराने फार्मूले के अनुसार ही पेंशन का भुगतान किया जाता है.

कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसकी पत्नी को आधी पेंशन देने का प्रावधान है, जो कि उचित नहीं है. यह सरकारी व्यवस्था है, जहां सरकार अपने पैसे से पेंशन देती है. भविष्य निधि की पेंशन हमारे पैसे से ही दी जाती है इसलिये मृत्यु उपरांत पेंशन आधी करने का कोई औचित्य नहीं है.

पत्नी की मृत्यु होने के बाद पेंशन फंड की राशि भविष्य निधि संगठन द्वारा जब्त कर ली जाती है जो कि उचित नहीं है. ईपीएफओ द्वारा प्रतिमाह पेंशन फंड में जमा योगदान पर ब्याज नहीं दिया जाता. सिर्फ कर्मचारी के खाते में जमा होने वाले अंशदान पर ब्याज दिया जाता है. हमारी मांग है कि पेंशन फंड पर भी ब्याज दिया जाये.

आमरण अनशन पर बैठेंगे पेंशनर

  • पंचानन भवन में प्रदर्शन

निवृत्त कर्मचारी 1995 (राष्ट्रीय ) समन्य समिति के राष्ट्रीय उप महासचिव चंद्रशेखर परसाई ने बताया कि आज पंचानन भवन के समक्ष प्रदर्शन किया गया. प्रदर्शन के दौरान आयोजित सभा में ईपीएफ के अंशदाताओं एवं पेंशनभोगियों की समस्याओं पर चर्चा की गई.

कोशियारी कमेटी की सिफारिशों को लागू करवाने के बाद सेवारत् एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों को हायर पेंशन का लाभ दिलवाने ईपीएफ फंड के ऊपर ब्याज दर 8.65 प्रतिशत के स्थान पर 10 प्रतिशत करने, 31 मई 2017 का आदेश निरस्त करवाने एवं सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के आधार पर जारी 23 मार्च-17 के आदेश को लागू करवाने को लेकर नई दिल्ली के रामलीला मैदान में 21 फरवरी को विशाल आमसभा का आयोजन किया जा रहा है.

20 फरवरी को समिति के 7 पदाधिकारी आमरण अनशन पर बैठेंगे. चंद्रशेखर परसाई ने बताया कि 1 सितंबर 2014 के बाद सेवारत् एवं रिटायर्ड कर्मचारियों को हायर पेंशन के संबंध में दिल्ली रैली के बाद जबलपुर हाईकोर्ट में केस दायर किया जावेगा. आज की सभा को चंद्रशेखर परसाई, अजय श्रीवास्तव, अनिल बाजपेई, व्ही.के. व्यास, डॉ. ए.के. निगम, ओ.पी. सोनी ने संबोधित किया.

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