मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य के सामाजिक न्याय विभाग में पेंशन पाने वाले भूतपूर्व कर्मचारियों के बारे में रियलिटी टेस्ट कराया तो पता चला 1100 ऐसे लोग पेंशन ले रहे थे जिनकी मौत हो चुकी है या उनके दिये गये पतों पर वे लोग ही नहीं है.

लेकिन इन मृत या लापता व्यक्तियों की पेंशन बराबर निकाली व उनके द्वारा ली जा रही है. सरकार की पेंशन बैंकों के जरिये उनके पेंशन खातों में दी जाती है. बैंक भी समय-समय पर इन लोगों से जीवित रहने का प्रमाण पत्र लेते रहते है.

सरकार इस नतीजे पर पहुंची है कि रियलिटी टेस्ट से मात्र 1100 लोगों की जानकारी आ पायी है. जहां पेंशन गलत लोग लेते जा रहे हैं. लेकिन पूरे राज्य में ऐसे हजारों लोग होंगे जो मृत या लापता है और उनकी पेंशन खजाने से बैंकों में जा रही है और निकाली जा रही है.

वे कौन लोग है जो बैंकों से यह रुपया धोखाधड़ी से निकाल रहे हैं. परिवार के लोगों ने ही पेंशनधारी की मृत्यु हो जाने की सूचना नहीं दी होगी और उनका कोई परिवार का सदस्य ही बैंक के स्टाफ की मदद से यह काम कर रहा है. इसमें भी बैंक के अधिकारियों का भ्रष्टाचार व रिश्वत नजर आती है.

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