पांच साल नवंबर 2014 के बाद पेट्रो क्रूड की कीमतें अत्याधिक 70 डालर के ऊपर पहुंच गयी और ब्रेन्ट क्रूड की कीमत 75 डालर प्रति बेरल से ऊपर चली गयी.

विश्व में तेल बाजार की आपूर्ति अरब खाड़ी के देशों में इरान, दक्षिण अमेरिका का राष्ट्र वेनेजुएला और रूस करते हैं. परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका और इरान में बरसों से राजनैतिक खींचतान चली आ रही है.

एक समय अमेरिका ने इरान के तेल निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिये. भारत सबसे ज्यादा क्रूड आयात इरान व सऊदी अरब से करता है. भारत ने अमेरिकी प्रतिबंधों की परवाह न करते हुए इरान से भुगतान रुपयों में करने के आधार पर आयात जारी रखा. लेकिन इसकी मात्रा में कमी आयी थी.

वर्ष 2016 में यह अमेरिकी प्रतिबंध हटने से ईरान एक बार फिर सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश बना. अब फिर उस पर अमेरिकी प्रतिबंध की आशंका हो रही है. इससे भी वर्तमान में क्रूड के भावों में 70 डालर प्रति बेरल का उछाल आ गया है.

वेनेजुएला में इन दिनों भारी राजनैतिक अस्थिरता आयी है और उससे वहां होने वाला तेल उत्पादन घटा है. रूस और ओपेक (आइल प्रड्यूसिंग कन्ट्रीज) ने तेल आपूर्ति में कमी करने में भी क्रूड के भाव बढ़े है.

अमेरिका ने अपने राजनैतिक कारणों से इस तरह से अन्य देशों पर जो आर्थिक प्रतिबंध लगाया है उससें दूसरे देशों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है. ऐसा भी लगता है कि वह अपनी राजनैतिक शक्ति का दुरुपयोग करता है. हाल ही में उसने उत्तर कोरिया पर भी ऐसे प्रतिबंध लगाये है लेकिन उसका लगभग पूरा व्यापार चीन के साथ ही होता है, वह चलता रहा.

भारत को क्रूड की कीमतों को लेकर भारतीय अर्थव्यवस्था और आम लोगों के हित के लिये भी स्थाई पेट्रो नीति बनानी चाहिए. एक तो पेट्रोल डीजल को जी.एस.टी. के अंतर्गत लाना चाहिए. इससे देश में ट्रक ट्रांसपोर्ट के रेट पूरे राष्ट्र में एक हो सकेंगे और वस्तुओं के भाव पूरे राष्ट्र में एक से रहेंगे. अन्यथा जी.एस.टी. का उद्देश्य कभी पूरा नहीं होगा.कुछ वर्ष पूर्व पेट्रो क्रूड के भावों में बहुत तेजी से गिरावट आयी.

भाव गिर कर 42-43 डालर प्रति बेरल तक आ गये. इससे काफी पहले ही भारत सरकार ने पेट्रोल-डीजल को सरकारी मूल्य नियंत्रण से हटाकर बाजार मूल्यों पर आधारित कर दिया. जिसका अर्थ यह था कि जब भाव घटेंगे तो देश में भाव भी गिरेंगे और भाव बढऩे पर बढ़ेंगे. लेकिन इस मामले में जब भाव गिरे तो केंद्र व राज्य सरकारों ने जनता के साथ विश्वासघात किया.

जिस अनुपात में भाव बढ़े उसी अनुपात में एक्साइज व वेट टैक्स बढ़ा दिये गये. जिसे इनके टैक्सों से हो रही राज्य की आमदनी यथावत रहे. यह काम भाव घटते ही दूसरे दिन ही कर दिया जाता रहा. लेकिन अब जब क्रूड के भाव बढऩे से पेट्रोल डीजल के भाव बढ़े तो सरकारों ने उसी अनुपात में अपने टैक्स नहीं घटाये ताकि जनता पर महंगाई का असर न पड़े. भाव बढऩे से सरकार की टैक्स आमदनी भी बढ़ी थी.

अब सरकारों को इस मामले में पेट्रोल-डीजल की स्टेंडर्ड कीमत तय कर देनी चाहिए और भाव गिरने व बढऩे के साथ टैक्स घटा या बढ़ा कर उसे एक ही स्तर पर बने रहने दिया जाए. जी.एस.टी. का उद्देश्य भी यही है अच्छा यहीं रहेगा इसे जी.एस.टी. में लाया जाए.

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