जिस तरह केन्द्र व राज्य सरकारों ने कृषि और कृषक अर्थ व्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था की है और उसमें ‘भावान्तर’ भी जोड़ दिया गया है कि जब भी कृषक भाव और बाजार भाव में मूल्य में कमी होने पर जो अन्तर आयेगा वह सरकार कृषक को देगी.

इसी तरह सरकार को अब कृषि अर्थव्यवस्था की तरह राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की स्थिरता के बारे में सोचना चाहिए. अभी कर्नाटक विधानसभा के चुनाव खत्म होते ही पेट्रोल व डीजल के भावों में भारी वृद्धि कर दी.

इससे मात्र 19 दिन पहले ही इन दोनों वस्तुओं के भाव बढ़ाए गए थे. इस बार भाव बढऩे से देश में पेट्रोल 80 रुपये लीटर और डीजल 70 रुपये लीटर पर पहुंच गया है.

हर बार इनके भाव बढऩे से देश में ट्रक ट्रान्सपोर्ट व यात्री भाड़ा के भाव चढ़ जाते हैं. इनके भाव बढऩे का सिलसिला जारी रहने के भी आसार हैं. राजनैतिक कारणों से हाल ही में अमेरिका इरान के साथ हुए परमाणु करार से अलग हो गया और वह इरान पर फिर से आर्थिक प्रतिबंध लगा रहा है. भारत अपना अधिकांश पेट्रो क्रूड इरान व सऊदी अरब से आयात करता है.

लगातार भाव बढऩे से भारत की अर्थव्यवस्था कभी स्थिर नहीं रह सकती. जी.एस.टी. का पूरे राष्ट्र में हर वस्तु का एक भाव और पूरे राष्ट्र का एक बाजार का उद्देश्य कभी भी नहीं पाया जा सकता है. मूल्य वृद्धि लगातार होती ही रहेगी. इसलिये यह जरूरी हो गया है कि भारत सरकार पेट्रोल डीजल के भावों पर ‘न्यूनतम और अधिकतम समर्थन मूल्य’ की व्यवस्था लागू करे.

पूरे राष्ट्र में इनका एक न्यूनतम और अधिकतम भाव तय कर दिया जाये. इनके नीचे गिरने या ऊंचे जाने पर केंद्र सरकार अपने फंड से निश्चित मूल्य दर स्थिर रखेगी. इसके लिये पेट्रोलियम मूल्य स्थिरता फंड बनाया जाना चाहिये जिसकी फंडिंग से इनके भाव स्थिर रखे जायेंगे.

अभी भाव बढ़ रहे हैं कुछ समय पूर्व इनके भाव गिरे थे तो केंद्र सरकार ने एक्साइज और राज्य सरकारों ने उनके वेट टैक्स के रेट भी बढ़ाकर उनकी आमदनी को स्थिर किया था. इसी तरह अब देश के हर नागरिक को मूल्य स्थिरता देने के लिए देश में पेट्रोल-डीजल न्यूनतम और अधिकतम मूल्य निश्चित करने ही चाहिये. बढ़ते दामों में भारत की अर्थव्यवस्था ही अस्थिर बनी रहेगी.

अर्थव्यवस्था को स्थिर करने में बाजारों में वस्तुओं के मूल्य भी स्थिर रहने चाहिए और यह केवल जी.एस.टी. से नहीं पाया जा सकता. जी.एस.टी. से भी ज्यादा जरूरी देश में ट्रान्सपोर्ट में माल भाड़ा व यात्री किराये में स्थिरता लाना जरूरी है.

समर्थन मूल्य का प्रयोग कृषि अर्थव्यवस्था में सफल रहा है और यह कृषि अर्थ-व्यवस्था व खाद्यान्न व्यापार की स्थाई व्यवस्था बन गया है. इसी सफलता का दायरा बढ़ाते हुए पेट्रोल-डीजल दर सरकारी समर्थन मूल्य की व्यवस्था भी प्रारंभ की जाए.