22 फरवरी से विधेयक लागू

भोपाल,

गुजरात, उत्तराखंड और दिल्ली जैसे राज्यों की तर्ज पर अब प्रदेश सरकार ने भी निजी स्कूलों की फीस में होने वाली अप्रत्याशित बढ़ोतरी पर लगाम लगाने का फैसला कर लिया है.

शिवराज सरकार ने राज्य निजी स्कूलों की फीस में होने वाली अप्रत्याशित वृद्धि को रोकने के लिए विशेष विधेयक को मंजूरी दी है जिसके बाद इसे 22 फरवरी से राज्य में लागू कर दिया गया है.

इस विधेयक के प्रभावी होने के बाद अब निजी स्कूल अपनी फीस में हर साल अधिकतम 10 फीसदी की ही बढ़ोतरी कर सकेंगे. इसके अलावा यदि स्कूल प्रबंधन पिछले वर्ष के तुलना में फीस में 10 से 15 फीसदी की बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखता है तो उसे इसके लिए अनिवार्य रूप से जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बनी जिला समिति की मंजूरी लेनी पड़ेगी.

इसी प्रकार अगर स्कूल में फीस वृद्धि के लिए 15 फीसदी से अधिक की दर का प्रस्ताव रखते हैं तो उन्हें इसके लिये आयुक्त लोक शिक्षण की अध्यक्षता में गठित राज्य समिति से इसकी अनुमति लेनी पड़ेगी. विधेयक के प्रभावी होने के बाद स्कूलों में फीस संबंधी नियमों

दोबारा दोषी पाए जाने पर 4 लाख जुर्माना

शासन द्वारा मंजूर विधेयक के मुताबिक लगातार दो बार अतिरिक्त फीस वसूलने का दोषी पाए जाने वाले स्कूलों पर जिला समिति द्वारा चार लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, साथ ही दोषी स्कूल की मान्यता रद्द करने की अनुशंसा भी की जाएगी.

राज्य सरकार के मुताबिक इन सभी प्रावधानों से स्कूलों में हो रहे शिक्षा के व्यवसायीकरण को रोकने में मदद मिलेगी, साथ ही फीस में अप्रत्याशित वृद्धि करने की प्रवृत्ति पर भी रोक लगाई जा सकेगी.

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