नयी दिल्ली,  मोदी सरकार ने 2017-18 के बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर देते हुये गाँव, गरीब, किसान तथा निजी आय करदाताओं के लिए रियायतों का पिटारा खोलने के साथ ही कर चोरी करने वालों और राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे पर शिकंजा कसन के लिए कड़े कदम उठाये हैं।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संसद में अपना चौथा बजट पेश करते हुये कहा कि सरकार का एजेंडा प्रशासन की गुणवत्ता तथा जनता के जीवन स्तर में आमूल परिवर्तन लाना, समाज के विभिन्न तबकों विशेषकर युवाओं एवं कमजोर वर्ग में शक्ति का संचार तथा देश में भ्रष्टाचार, कालाधन और अपारदर्शी राजनीतिक वित्त पोषण की बुराइयों को समाप्त करना है।

उन्होंने कहा कि बजट 10 स्तंभों ‘किसान, गाँव, युवा, गरीब, इन्फ्रास्ट्रक्चर, वित्तीय क्षेत्र, डिजिटल इंडिया, सरकारी सेवा, मितव्ययता और सरल कर पर आधारित है। नोटबंदी को दीर्घकालिक लिहाज से अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत लाभकारी बताते हुये श्री जेटली ने नौकरीपेशा लोगों को कर में 12,500 रुपये की सालाना बचत का तोहफा देते हुये ढाई लाख से पाँच लाख रुपये तक की आय पर कर की दर 10 फीसदी से घटाकर आधी पाँच फीसदी करने का एेलान किया।

इससे कर राजस्व 15500 करोड़ रुपये घटेगा जबकि 50 लाख रुपये से एक करोड़ रुपये की आय पर 10 फीसदी अधिभार लगाने का प्रस्ताव किया गया है जिससे 2700 करोड़ रुपये का अतिरक्त राजस्व मिलेगा। वर्ष 2017-18 के लिए कुल 21,46,735 करोड़ रुपये के बजट में किसानों के लिए रिकॉर्ड 10 लाख करोड़ रुपये के कृषि ऋण का लक्ष्य रखा गया है। कुल बजट में कर से 12,27,014 करोड़ रुपये, गैर-कर राजस्व मद से 2,88,757 करोड़ रुपये तथा ऋण और दूसरे मदों से 6,30,964 करोड़ रुपये की पूँजी प्राप्त होने का अनुमान है।

वित्तीय प्रबंधन पर जोर देते हुये आगामी वित्त वर्ष में राजस्व राजस्व घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.2 प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य रखा गया है जबकि वित्त वर्ष 2018-19 में इसे और कम कर तीन प्रतिशत पर रखने की बात कही गयी है। मौजूदा वित्त वर्ष में अद्यतन आँकड़ों के अनुसार यह जीडीपी के 3.5 प्रतिशत पर है। आम बजट का हिस्सा बनाये गये रेलवे के लिए 1,31,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

इसमें 55 हजार करोड़ रुपये सरकार मुहैया करायेगी। रेलवे में यात्री सुरक्षा, पूँजीगत और विकास कार्य, स्वच्छता तथा वित्त एवं लेखा सुधार पर जोर देते हुये आगामी पाँच वर्षों में एक लाख करोड़ रुपये का राष्ट्रीय रेल सुरक्षा कोष बनाया जायेगा। इस कोष का इस्तेमाल यात्री सुरक्षा बढ़ाने के लिए किया जायेगा।