नई दिल्ली. देश की इकोनॉमी में जेम्स और ज्वेलरी उद्योग की काफी अहमियत है. ये सेक्टर हर साल करीब 43 अरब डॉलर का एक्सपोर्ट करता है और इसका घरेलू बाजार भी करीब 20 अरब डॉलर का है. बजट में इस उद्योग को भी वित्त मंत्री अरुण जेटली से काफी उम्मीदें हैं. जयपुर देश में जेम्स और ज्वेलरी उद्योग का एक बड़ा केंद्र है. यहां के कारोबारी आम बजट में टैक्स राहत और दूसरी सुविधाओं की उम्मीद कर रहे हैं.

भारत में जेम्स और ज्वेलर कारोबार का बड़ा केंद्र जयपुर है और यहां के कारोबारियों को उम्मीद है कि मोदी सरकार अपने बजट में उनके हितों का खास ख्याल रखेगी. मसलन ये कारोबारी चाहते हैं कि इस उद्योग पर प्रिजम्पटिव टैक्स लागू किया जाए. यानि केंद्र सरकार उनके मुनाफे का अनुमान लगाकर टैक्स का एक रेट तय कर दे.

गौरतलब है कि दुनिया के कई देश हीरा कारोबार में मुनाफा 2-3 फीसदी मानकर उस पर प्रिजम्पटिव टैक्स लगाते हैं. लेकिन भारत में प्रिजम्पटिव टैक्स ना होने के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के हीरा कारोबार को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. इन कारोबारियों का कहना है कि अगर केंद्र सरकार इसे लागू करती है तो इससे एक्सपोर्टरों को राहत तो मिलेगी ही साथ ही प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी बढ़ेंगे.

प्रिजम्पटिव टैक्स लगाने के साथ साथ ये कारोबारी कलर स्टोन पर लगने वाली ड्यूटी भी हटाने की मांग कर रहे हैं. जेम्स और ज्वेलर कारोबारी चाहते हैं कि वित्त मंत्री अपने बजट में रत्नों को तराशने और ज्वेलरी बनाने की मशीन के इंपोर्ट पर लगने वाले टैक्स भी खत्म कर दें.

उधर, सर्राफा कारोबारी सोने पर कस्टम ड्यूटी घटाने की मांग कर रहे हैं. कारोबारियों का कहना है कि कस्टम ड्यूटी के चलते सोने की स्मगलिंग बढ़ी है और व्यापारियों को एक नंबर में सोना मिलना मुश्किल हो गया है.
गौरतलब है कि देश में जेम्स और ज्वेलरी कारोबार में 20 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला हुआ है. इस कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि ये कारोबार अब एक बड़े उद्योग की शक्ल ले चुका है. इसलिए सरकार को इस क्षेत्र की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए नहीं तो आगे चलकर ये उद्योग परेशानी में आ जाएगा.

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