जनपदीय एवं सरोकारी पत्रकारिता के महत्व को किया स्थापित

  • माखनलाल विवि के सभागार में संगोष्ठी का आयोजन

भोपाल,

पंडित बनारसीदास चतुर्वेदी ने जीवनपर्यंत सिद्धांतों से समझौता नहीं किया, पत्रकारिता में उन्होंने जो मान्यताएं स्थापित कीं. वे हमारे लिए प्रकाश स्तम्भ हैं.

जनपदीय स्थानीय पत्रकारिता का महत्व स्थापित करने का श्रेय बनारसीदास चतुर्वेदी को जाता है. मधुकर के माध्यम से उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता और बुंदेली साहित्य को समृद्ध किया. यह विचार वरिष्ठ साहित्यकार गुणसागर सत्यार्थी ने पंडित बनारसीदास चतुर्वेदी की पुण्यतिथि पर पत्रकारिता एवं संस्मरण साहित्य में बनारसीदास चतुर्वेदी का योगदान विषय पर आयोजित संगोष्ठी में व्यक्त किए.

सत्यार्थी ने कहा कि आज पत्रकारिता और साहित्य में वैसी सैद्धांतिक प्रतिबद्धतता देखने में नहीं आती है, जो बनारसीदास चतुर्वेदी के समय में देखने में आती थी. उनका मानना था कि सीमित क्षेत्र में अधिक ठोस कार्य करने की संभावना रहती है.

इसलिए वह कहते थे कि स्थानीय पत्रों को अखिल भारतीय होने की जिद छोड़ देनी चाहिए और अपने अंचल की सेवा के लिए कार्य करना चाहिए. यह छोटे समाचार-पत्रों क लिए भी अच्छा रहेगा और पत्रकारिता एवं समाजहित में भी होगा.

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलाधिसचिव लाजपत आहूजा ने कहा कि पंडित बनारसीदास चतुर्वेदी एक महत्वपूर्ण पीढ़ी के प्रतिनिधि रहे हैं, जिसने आजादी के पूर्व और आजादी के बाद, दोनों समय में पत्रकारिता की.

उन्होंने पत्रकारिता को मिशन से मीडिया बनते देखा है. स्वर्गीय चतुर्वेदी ने पत्रकारों के लिए आदर्श आचार संहिता भी तैयार की थी. इस संबंध में उन्होंने एक सूची बनाई थी, जिसमें बताया गया था कि पत्रकार को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

न भूलेंगे-न बिसरेंगे का विमोचन

पुस्तक न भूलेंगे-न बिसरेंगे मध्यप्रदेश की पत्रकारिता के 6 सुनहरे पृष्ठ का विमोचन किया गया, पुस्तक का संपादन श्री लाजपत आहूजा ने किया. जिसमें सहयोग वरिष्ठ पत्रकार गिरीश उपाध्याय ने किया है. पुस्तक में मध्यप्रदेश के छह पत्रकार ओपी कुंद्रा, मदन मोहन जोशी, काशीनाथ चतुर्वेदी, जवाहर लाल राठौड़, बनवारी लाल बजाज और सूर्यनारायण शर्मा के संबंध में विस्तृत आलेख शामिल हैं.

पुस्तक के संबंध में आहूजा ने बताया कि पिछले कुछ समय में प्रदेश के कुछ ऐसे नामचीन पत्रकारों का देहावसान हुआ है, जिनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता. पुस्तक में शामिल पत्रकार युवा पत्रकारों के लिए प्रेरणास्रोत हैं. पुस्तक का प्रकाशन माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय ने किया है.

व्याख्यान में बनारसी चतुर्वेदी के बारे में बहुत कुछ जानने को मिला, उनके व्यक्तित्व से हमें पत्रकारिता के विभिन्न मूल्यों के बारे में जाना का मौका मिला.
-कोमल निगम, स्टूडेट

मै पत्रकारिता की स्टूडेट हूँ, और पत्रकारिता के चतुर्वेदी जी के गुणों से सच में मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला. और यह आगे हमें पत्रकारिता में बहुत काम आयेगा.
-वर्षा मौर्य, स्टूडेट

बुदेली भाषा को समृध्द बनाने क ा श्रेय बनारसी चतुर्वेदी को जाता है, मूल्यों की पत्रकारिता के वो पुरोधा थे. मिशन से आधुनिक पत्रकारिता में भी इन्ंहोने मूल्यों की पत्रकारिता को जीवित रखता. हिन्दी के प्रति इनका एक आत्मीय लगाव था.
-नरेन्द्र त्रिपाठी, प्राध्यापक

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