नवभारत न्यूज भोपाल,

80 वर्षीय वृद्ध महिला अपनी करोड़ों रुपए की संपत्ति की धोखाधड़ी के चलते अब दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है. शुक्रवार को वृद्ध महिला को इस मामले में अदालत में व्हील चेयर पर गवाही देने आना पड़ा, लेकिन आरोपियों पर पुलिस की मेहरबानी के चलते उन्हें बिना गवाही दिए ही अदालत से वापस जाना पड़ा.

उल्लखेनीय है कि एमपी नगर जोन-2 में स्थित करोड़ों रुपए की संपत्ति की मालकिन 80 वर्षीय वृद्ध महिला उषा माहेश्वरी ने अपने साथ हुई धोखाधड़ी के संबंध में एमपी नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने गई थी. लेकिन पुलिस ने अपने क्षेत्राधिकार का मामला नहीं होना बताकर महिला को थाना टीटी नगर भेज दिया गया था. थाना टीटी नगर ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए करीब सात आरोपियों के खिलाफ भादसं की धारा 418, 420, 471, व 120बी के तहत नामजद मामला दर्ज कर लिया था.

उसके बाद अभी तक टीटी नगर पुलिस ने मात्र दो आरोपी संजय मंत्री और दयाशंकर श्रीवास्तव को ही गिरफ्तार कर उनके विरूद्ध अदालत में चालान पेश किया है तथा शेष रसूखदार आरोपी रोहित जैन, राज लक्ष्मी पण्डित, संदीप खरे और मो.जहीर खान लगभग दो साल से पुलिस गिरफ्त से अभी तक बाहर हैं जो कि वे शहर में खुलेआम घूमते दिखायी देते हैं.

पुलिस की उदासीनता के कारण आज तक फरियादी महिला के अपर सत्र न्यायाधीश कृष्णा अतुलकर की अदालत में बयान दर्ज नहीं हो सके, क्योंकि पुलिस ने चालान के साथ मूल दस्तावेज जानबूझकर अदालत में पेश नहीं किए. जबकि कानून के जानकारों का कहना है कि बाकी के फरार आरोपियों की गिरफ्तारी तथा उनके विरूद्ध पूरक चालान पेश होने पर फरियादी महिला को पुन: कई बार अदालत में गवाही के लिए आना पड़ेगा. इस प्रकार पुलिस की मेहरबानी के कारण वृद्ध महिला को न्याय पाने के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है.

अदालत में व्हील चेयर पर गवाही देने आयी उषा माहेश्वरी ने बताया कि वह कई गंभीर बीमारियों से ग्रस्त है. पुलिस के इस तरह के रवैये के कारण उसे अपने जीवन काल में तो न्याय मिलने की कोई संभावना नजर नहीं आ रही है. उन्होंने यह भी कहा की पुलिस उनके मरने का इंतजार कर रही है. उसके मरने के बाद स्वत: ही सभी फरार आरोपी कानूनी प्रक्रिया से बच जाएंगे.

Related Posts: