कभी मध्यप्रदेश के चंबल अंचल की पहचान दस्यु समस्या के कारण थी, लेकिन वक्त बदल गया है. कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर पुरजोर प्रयासों के साथ ही सामाजिक स्तर पर किए गए प्रयासों के चलते आज दस्यु समस्या का उन्मूलन हो चुका है. अब चंबल में कोई बड़ा दस्यु गिरोह सक्रिय नहीं है लेकिन चंबल की एक और पहचान आज भी जस की तस बरकरार है और यह समस्या है बीहड़ों की. बीहड़ों के कारण चंबल घाटी में हजारों हेक्टर जमीन अनुत्पादक स्थिति में है.

नवभारत ने ही सर्वप्रथम चंबल के बीहड़ों के समतलीकरण की बात उठाते हुए इसके लिए मुहिम चलाई थी. सिर्फ चंबल ही नहीं बल्कि समूचे मध्यप्रदेश के लिए यह सुकून की बात है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चंबल संभाग में बीहड़ को कृषि योग्य बनाने के लिए 1200 करोड़ रूपए खर्च करने की घोषणा की है. सरकार इन बीहड़ों को समतल कर किसानों को जमीन आवंटित करेगी.

प्रदेश सरकार की यह बड़ी सुकून भरी घोषणा है. यदि यह योजना क्रियान्वित होती है तो हजारों बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा. लोगों को आमदनी के अतिरिक्त साधन मिल सकेंगे और गरीबों के घर में खुशहाली आएगी.

यह सच्चाई है कि चुनावी वर्ष में किसी भी सरकार द्वारा की जाने वाली जनहितैषी घोषणाओं को चुनावी लाभ-हानि के चश्मे से देखा जाता है. हम उम्मीद लगा सकते हैं कि किसान महासम्मेलन में मुख्यमंत्री द्वारा की गई यह घोषणा चुनावी हित-लाभ से परे है और इसका क्रियान्वयन भी इसी वर्ष शुरू हो सकेगा.

जाहिर है कि बीहड़ों के समतलीकरण का कार्य सरकार अथवा सरकार द्वारा नियुक्त किसी निजी एजेंसी के जरिए कराया जाएगा. इस योजना से स्थानीय जनता का सीधा जुड़ाव तभी होगा जब समतलीकरण का कार्य पूर्ण होने के बाद इस जमीन के आवंटन की प्रक्रिया प्रारंभ होगी.

यह भूमि आवंटन उन्हीं लोगों को किया जाना चाहिए जिनके पास कृषि भूमि नहीं है अथवा न के बराबर है.सरकार की मंशा यही होनी चाहिए कि अधिकाधिक बेरोजगारों का इस योजना के माध्यम से पुनर्वास हो.बीहड़ समतलीकरण से इस क्षेत्र में आवास समस्या भी दूर हो सकती है. यह जमीन खेती-किसानी के लिए तो दी ही जाए. यहां गरीबों के लिए अत्यंत सस्ती दर पर मकान बनाकर भी दिए जाने चाहिए.

यह माना जाता है कि चंबल संभाग के तीनों जिलों मुरैना, भिण्ड एवं श्योपुर के चहुंमुखी विकास में बीहड़ ही सबसे बड़ी बाधा हैं. कुछ इतर कारण भी हैं, दोनों जिलों मुरैना के बानमोर एवं भिण्ड के मालनपुर में करीब तीन दशक पूर्व औद्योगिक परिक्षेत्र विकसित किए गए थे, देश भर के तमाम उद्योगपतियों ने यहां आकर कारखाने लगाए लेकिन इनमें से कुछ ही कारखाने चालू हैं, जरूरी सुविधाएं न मिलने, कानून व्यवस्था एवं मॉनीटरिंग के अभाव जैसे कारणों के चलते यहां से कई बड़े कारखानों ने पलायन कर दिया, या बंद हो गए. इस तरह की विसंगतियां भविष्य की योजनाओं में न हों.

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