भारत-ईरान और अफगानिस्तान का चाबहार बंदरगाह प्रोजेक्ट तीनों देशों को आर्थिक संबंधों से बहुत गहरा जोड़ चुका है. इसमें सबसे बड़ा लाभ अफगानिस्तान को हुआ कि वह इस चाबहार के जरिए लेन्ड लाक्ड राष्ट्र होने के बावजूद समुद्री मार्ग से दुनिया के लिये खुल गया. भारत अभी तक अपना व्यापार अफगानिस्तान से पाकिस्तान के सडक़ मार्ग के जरिये करता था.

अब पिछले साल 2017 भारत ने अफगानिस्तान को गेहूं की काफी बड़ी मात्रा में आपूर्ति चाबहार बंदरगाह के जरिये करना प्रारंभ कर दिया. अब भारत चाबहार बंदरगाह से अफगानिस्तान को रेल मार्ग से भी जोड़ रहा है.

चाबहार बन्दरगाह भारत का चीन को उसके ग्वादर बन्दरगाह का जवाब है जो उसने पाकिस्तान से करार कर उसकी जमीन से गुजरता आर्थिक गलियारे से चीन को ग्वादर तक जोड़ा है. तीनों देशों का चाबहार चीन को उसके वन बेल्ट वन रोड का भी जवाब है. यह भारत-ईरान व अफगानिस्तान का यातायात गलियारा है.

ईरान के राष्टï्रपति श्री हसन रुहानी ने अपनी पहली भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने 9 समझौते किये हैं. इन करारों में दोहरे कर और कर सेविंग्स में रोकथाम, राजनियक पासपोर्ट धारकों को वीजा में छूट, प्रत्यर्पण संधि का समझौता, चाबहार पोर्ट के पहले चरण के लिए समझौता, परम्परागत और आधुनिक मेडिसन में सहयोग, दोनों देशों के आपसी व्यापार को बढ़ाना, कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में सहयोग, स्वास्थ्य-दवाओं के क्षेत्र में सहयोग और पोस्टल सहयोग के लिए एम.ओ.यू. शामिल हैं.

भारत और ईरान चाबहार को बड़ा कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट जानकर उस पर काम कर रहे हैं. प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि ईरान में चाबहार पोर्ट के निर्माण में जिस तरह का सहयोग दिया वह प्रशंसनीय है.

ईरान के राष्टï्रपति श्री रुहानी ने कहा कि चाबहार पोर्ट का विकास जारी रहेगा. हमे दोनों अपने पड़ोसी देश अफगानिस्तान को शांत व समृद्ध देखना चाहते हैं. चाबहार के जरिये अब अफगानिस्तान अपनी निकासी व व्यापार के लिए किसी भी तरह पाकिस्तान का मोहताज नहीं रहा. अफगानिस्तान भारत और ईरान के चाबहार सहयोग को उसके देश के लिये आर्थिक स्वाधीनता मानता है.

ऊर्जा सुरक्षा के लिए भारत और ईरान के बीच फरजाद की गैस फील्ड पर वार्ता तेज करने पर सहमति हो गयी है. दोनों देशों के बीच 2008 में प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर हुए थे लेकिन वह लागू नहीं हो पाती जो अब ईरान के राष्ट्रपति की भारत के समय हुए समझौते से 2018 में लागू हो गयी है. इस समय जो करार हुए हैं उसमें से एक के तहत शाहिद बेहेस्तीपोर्ट (चाबहार चरण एक) को 18 माह के लिये भारतीय कम्पनी को लीज पर सौंप दिया है. पिछले साल दिसम्बर 2017 में इस प्रथम चरण पर काम शुरू हो चुका है.

पश्चिमी राष्ट्रों ने ईरान पर परमाणु अप्रसार के मुद्दे पर कई प्रतिबंध लगाए हुए हैं लेकिन भारत ने अपनी ओर से पहली बार यह तय किया है कि वह रुपया मुद्रा में ईरान में पूंजी निवेश करेगा. भारत को पेट्रो क्रूड की आपूर्ति करने में ईरान अग्रणी राष्ट्र  है.

श्री रुहानी ने कहा है कि भारत और ईरान दोनों देशों के बीच रेल संबंध भी स्थापित करने की ओर अग्रसर हो रहे हैं. भारत ओमान से 1100 कि.मी. लंबी गैस पाइप लाइन लाना चाह रहा है. ईरान के फरजाद में भारत के सार्वजनिक उपक्रम ऑइल एंड नेचुरल गैस कमीशन ने गैस ब्लाक की खोज की है. अभी यह प्रोजेक्ट जरूर बहुत महंगा है लेकिन लंबे समय में इससे भारत-ईरान और ओमान को बहुत लाभ होगा.

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