नयी दिल्ली,

अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम में तत्काल गिरफ्तारी का प्रावधान हटाने के फैसले के विरोध में आज दलितों के ‘भारत बंद’ के दौरान कई स्थानों पर हिंसक घटनाओं में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गयी और पुलिसकर्मियों समेत कई लाेग घायल हो गये।

देशभर में विभिन्न हिस्सों ने दलित समाज के कई संगठनों ने फैसले का विरोध करते हुए हिंसक प्रदर्शन किये। कई स्थानों पर तोड़ फोड़, आगजनी, यातायात जाम करने, रेल पटरियां उखाड़ने तथा पुलिस के साथ झड़पें की खबरें मिली है।

कई शहरों में प्रदर्शनकारियों को तितर बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पडा। दलितों संगठनों के आयोजित किये गये भारत बंद से जनजीवन व्यापक रुप से प्रभावित रहा। कुछ स्थानों पर बाजार बंद रहे और वाहन नहीं चले।

राजस्थान, मध्यप्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा सहित कई राज्यों में हिंसक प्रदर्शन की खबरें मिली हैं जबकि पंजाब में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 10 वीं और 12 वीं की परीक्षाएं रद्द कर दी गयी हैं। कई शहरों में रेल, सड़क यातायात बंद और वाहनों को आग लगाने के समाचार भी मिलें हैं। राजस्थान में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गयी हैं।

इसके अलावा उत्तराखंड, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, छत्तीसगढ़, झारखंड, गोवा, ओडिशा, तेलंगाना और गुजरात में भी दलित समाज के संगठनों ने न्यायालय के फैसले के विरोध में प्रदर्शन किया। मध्यप्रदेश के ग्वालियर में दो तथा मुरैना तथा भिंड में एक एक व्यक्ति की मौत की हुई।

राजस्थान के अलवर में एक व्यक्ति की मौत की सूचना है। इन सभी स्थानों में हिंसक प्रदर्शन के दौरान सैंकडों लोग घायल हुए हैं। पुलिसकर्मियों के भी घायल होने की भी खबरें हैं।

इस बीच, केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि सरकार ने अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम के संबंध में हाल में आये फैसले के मद्देनजर उच्चतम न्यायालय में समीक्षा याचिका दायर कर दी है।उन्होंने सभी पार्टियों, संगठनों और लोगों से हिंसा नहीं भड़काने तथा शांति बनाये रखने की अपील की है।कृपया संपादक शेष पूर्व प्रेषित से जोड़ ले।

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