सेना की मदद से आग पर पाया गया काबू, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

  • रात्रि 3 बजे हुई घटना

नवभारत न्यूज भोपाल,

कभी राजधानी की शान कही जाने वाली चांदबड़ स्थित कपड़ा मिल में अचानक आधी रात के बाद भीषण आग लग गई. आग इतनी भयावह थी कि कुछ ही समय में इसने भीषण रूप ले लिया.

आग पर काबू पाने के लिए भोपाल के अलावा विदिशा और मंडीदीप से फायर बिग्रेड की गाडिय़ां बुलाना पड़ी, फिर भी आग पर काबू ना पाने की स्थिति में सेना का सहारा लिया गया. 60 दमकलों के साथ सेना के एक सैकड़ा से अधिक जवानों ने आग पर काबू पाया. आग से अभी तक 130 करोड़ के नुकसान की जानकारी सामने आई है. बताया जा रहा है कि शॉर्ट सर्किट की वजह से आगजनी की घटना घटित हुई है.

राज्यमंत्री विश्वास सारंग मौके पर पहुंचे और कर्मचारियों व उनके परिजनों को आश्वस्त किया कि कर्मचारियों को किसी तरह की कोई समस्या नहीं आएगी, वहीं आगजनी के कारणों को लेकर जांच कराई जाएगी. रविवार रात्रि 3 बजे के करीब कपड़ा मिल में आग लग गई.

कुछ ही समय में आग इतनी भयावह हो गई कि वहां पर आग की लपटें ही लपटें दिख रही थीं, आग की लपटों की तीव्रता के कारण मिल की बिल्डिंग का एक हिस्सा ध्वस्त हो गया. जिस समय आगजनी की घटना हुई उस समय ब्लो रूम में 2 लोग मौजूद थे.

आग लगने से मिल की एक यूनिट, गोदाम में रखा कच्चा माल और तैयार मटेरियल जलकर खाक हो गया. जैसे ही कर्मचारियों के परिजनों को इस घटना की जानकारी मिली वे भी वहां पर पहुंच गए और उनका रो-रोकर बुरा हाल था. परिजन व कर्मचारी यह कह रहे थे अब उनका क्या होगा.

आग पर काबू पाने के लिए जेसीबी से चार जगह दीवार तोड़ी गई. आग बुझाने के लिए 20 फायर फाइटर, विदिशा, सीहोर, मंडीदीप, भेल और मिलेट्री की फाइटर लगी थी, साथ ही 30 वाटर टैंकर का भी आग को रोकने के लिए उपयोग किया गया. गौरतलब है कि न्यू टेक्सटाइल मिल राष्ट्रीय उद्योग निगम की इकाई है, जिसकी स्थापना वर्ष 1938 में हुई थी और हाल ही में वर्ष 2013 में 70 करोड़ की लागत से नया प्लांट लगाया गया था.

बोले- कराया जा रहा आंकलन

एनटीसी के महाप्रबंधक अजय कुमार दीक्षित ने कहा कि दो इकाइयों में से एक में आग लग गई और वहां काम कर रहे कर्मचारियों के कर्मचारियों ने मिल परिसर से सुरक्षित रूप से बाहर निकल लिया है. अभी तक 130 करोड़ के नुकसान की जानकारी सामने आई है, आंकलन कराया जा रहा है.परिसर में दूसरी इकाई और गोदाम सुरक्षित हैं.

नहीं होता भीषण हादसा

कपड़ा मिल श्रमिक फेडरेशन के महासचिव विनोद रिकारिया ने कहा कि सुरक्षा उपकरणों का वर्ष 2013 से कभी परीक्षण नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि अगर अग्निशमन यंत्र सही होते तो शायद यह हादसा नहीं होता. उन्होंने कहा कि यूनिट में पानी के कंटेनर से जुड़ी पंप सहित अग्निशमन व्यवस्था अप्रभावी है, इनकी नियमित अंतराल पर जांचे होना चाहिए थी.

मजदूरों ने जैसे ही देखा मच गया हडक़ंप

सूत्रों के मुताबिक तीसरी पाली में मजदूर कपड़ा मिल में काम कर रहे थे, जैसे ही उन्होंने आगजनी की घटना को देखा तुरंत इसकी जानकारी दी, लेकिन अग्निशमन यंत्रों के काम नहीं करने की वजह से आग पर काबू नहीं पा सका और यह भीषण हादसा हो गया. एक मजदूर भी हल्का झुलस गया है, जिसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

नाकाफी साबित हुए इंतजाम

इस मामले में यह लापरवाही भी सामने आई कि फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा फायर रिंग लगाया गया था, लेकिन समय पर उसने काम नहीं किया. यह भी बताया जा रहा है कि शनिवार सुबह 9 बजे भी यहां शॉट सर्किट हुआ था, जिसके चलते प्रबंधन ने इलेक्ट्रीशियन को बुलाकर दिखाया था. इसके बाद फिर रात में भी यहीं शॉट सर्किट हो गया.

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