नासा के मुख्य वैज्ञानिक जिम ग्रीन ने कहा कि विशेषज्ञ पहले से जानते हैं कि मंगल पर भूकंप आए हैं, भूस्खलन हुआ है और उससे उल्का पिंड भी टकराए हैं ग्रीन ने कहा कि मंगल भूकंप का सामना करने में कितना सक्षम है?

अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने मंगल ग्रह के लिए मानव मिशन से पहले मार्स लैंडर स्पेसक्राफ्ट इनसाइट भेजा है. सतह की जानकारी के साथ लाल ग्रह पर भूकंप को मापने के लिए किया गया है.

नासा ने अपने नवीनतम मार्स लैंडर स्पेसक्राफ्ट इनसाइट के जरिए मंगल पर मानव अभियान से पहले उसकी सतह पर उतरने और वहां आने वाले भूकंप को मापने के लिए डिजाइन किया गया है अंतरिक्ष यान को एटलस वी रॉकेट के जरिए कैलिफॉर्निया स्थित वंडेनबर्ग वायुसेना अड्डे से अंतरराष्ट्रीय समय शाम 4.35 बजे लॉन्च किया गया.

यह परियोजना 99. 3 करोड़ डॉलर की है, जिसका लक्ष्य मंगल की आंतरिक परिस्थितियों के बारे में जानकारी बढ़ाना है साथ ही, लाल ग्रह पर मानव को भेजने से पहले वहां की परिस्थितियों का पता लगाना और पृथ्वी जैसे चट्टानी ग्रहों के निर्माण की प्रक्रिया को समझना है.

यदि सब कुछ योजना के मुताबिक रहता है तो लैंडर 26 नवंबर को मंगल की सतह पर उतरेगा इनसाइट का पूरा नाम इंटीरियर एक्सप्लोरेशन यूजिंग सिस्मिक इन्वेस्टिगेशंस है.

नासा के मुख्य वैज्ञानिक जिम ग्रीन ने कहा कि विशेषज्ञ पहले से जानते हैं कि मंगल पर भूकंप आए हैं, भूस्खलन हुआ है और उससे उल्का पिंड भी टकराए हैं ग्रीन ने कहा कि मंगल भूकंप का सामना करने में कितना सक्षम है? हमें जानने की जरूरत है अंतरिक्ष यान पर मुख्य उपकरण सिस्मोमीटर है, जिसे फ्रांंसीसी अंतरिक्ष एजेंसी ने बनाया है

कैसे करेगा काम

लैंडर के मंगल की सतह पर उतरने के बाद एक ‘रोबॉटिक आर्म’ सतह पर सेस्मोमीटर (भूकंपमापी उपकरण) लगाएगा दूसरा मुख्य औजार एक ‘सेल्फ हैमरिंग’ जांच है जो ग्रह की सतह में उष्मा के प्रवाह की निगरानी करेगा नासा ने कहा कि जांच के तहत सतह पर 10 से 16 फुट गहरा सुराख किया जाएगा यह पिछले मंगल अभियानों से 15 गुना अधिक गहरा होगा.

दरअसल, 2030 तक मंगल पर लोगों को भेजने की नासा की कोशिशों के लिए वहां का तापमान समझना महत्वपूर्ण है सौर ऊर्जा और बैटरी से ऊर्जा पाने वाला लैंडर को 26 महीने संचालित होने के लिए डिजाइन किया गया है.

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