रत्नकरण श्रावकाचार पर विशेष स्वाध्याय

भोपाल,

इन्द्रिय और मन को पूर्ण विराम देने पर ही अन्दर की चेतना जागृत होती है, इसी का नाम है साधना इसलिये मन और इन्द्रियों पर हमेशा संयम रखो, इन्हें वश में रखो, मन और इन्द्रिय भटकेंगे तो हम भी संसार में भटकते रहेंगे.

भटकाव से बचने और स्वयं के ठहराव के लिये इन्द्रिय और मन पर अंकुश अत्यंत आवश्यक है. उक्त उद्गार आचार्य विद्यासागर महाराज के शिष्य मुनिश्री भूतबली सागर महाराज ने चौक जैन धर्मशाला धर्मसभा में व्यक्त करते हुए कहा कि जब इन्द्रियां पूरी तरह विराम ले लेती हैं तब साधना प्रारम्भ होती है जब कोई व्यक्ति विचारों की गहराई में उतरता है तो आंखों का चश्मा सिर के ऊपर रख लेता है, उस समय आंखें बंद करके सोचता है और अपनी समस्या का समाधान उसे प्राप्त हो जाता है, इसलिये इन्द्रिय और मन को सदैव वश में रखना चाहिये क्योंकि संयम के अभाव में विवेक नहीं रहता और संयम तभी रहेगा जब हम इन पर काबू रखेंगे .

पंचायत कमेटी ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रमोद हिमांशु ने बताया कि मुनिश्री भूतबली सागर महाराज के सानिध्य में श्रीआदिनाथ जिनालय चौक की मूलनायक भगवान आदिनाथ वेदी के समक्ष चांदी का सिंहासन विराजमान किया गया सिंहासन विराजमान करने का सौभाग्य निधि मोदी परिवार एवं अन्य श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ.

मुनि संघ के द्वारा प्रतिदिन प्रात: 8 से 9 बजे आचार्य समंतभद्र द्वारा रचित ग्रंथ रत्नकरण, श्रावकाचार पर विशेष आशीषवचन दोपहर में शंका समाधान, सांय 5 बजे से गुरुभक्ति होती है.

अशोका गार्डन में जैन मेला

अशोका गार्डन स्थित जैन धर्मशाला में मंदिर समिति एवं पाठशाला समिति के तत्वावधान में जैन मेले का आयोजन किया गया.

राजधानी के विभिन्न जिनालयों में छोटे-छोटे बच्चों को संस्कृति और संस्कारों का ज्ञान देने पाठशालायें चल रही हैं इसी श्रृंखला में विभिन्न जिनालयों की पाठशाला के बच्चों द्वारा जैन मेले में खान-पान के साथ विभिन्न संदेश देते हुए स्टाल लगाये गये थे बच्चों में बाहरी खान-पान और जंक फूड की प्रवृत्ति से बचने के संदेश के लिये बच्चों द्वारा स्वयं भारतीय व्यंजन के साथ भारतीय शुद्ध पेय के स्टाल लगाये गये जिसका बड़ी संख्या में बच्चों सहित बड़ों ने भी आनन्द लिया.

साथ में आचार्यश्री का विशेष संदेश इंडिया नहीं भारत, गौसेवा और हथकरघा अपनाने का संदेश देते हुए स्टाल भी आयोजन स्थल पर लगे हुए थे.

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