कोलकाता, 4 सितंबर. खाने-पीने की वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने सरकार की नींद उड़ा दी है. तमाम कोशिशों के बाद भी वह कीमतों को थामने में विफल रही है.

अब महत्वपूर्ण कृषि जिंसों की आपूर्ति सुधार वह इस मोर्चे पर सफल होने की उम्मीद कर रही है. पांच महीने के लंबे अंतराल के बाद 20 अगस्त को समाप्त सप्ताह में खाद्य महंगाई की दर दहाई में पहुंच गई है. इस दौरान यह 10.05 प्रतिशत दर्ज की गई.

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने शनिवार को कहा कि खाद्य मुद्रास्फीति की दर का दहाई में पहुंचना चिंता की बात है. इसमें निश्चित तौर पर कुछ मौसमी कारकों की भूमिका है, लेकिन इसके अतिरिक्त तमाम महत्वपूर्ण जिंसों की आपूर्ति में भी दिक्कत आ रही है. उसी को सुधारने पर सरकार का जोर है. उन्होंने उम्मीद जताई कि इन प्रयासों से आने वाले समय में खाद्य मुद्रास्फीति की दर में कमी आएगी.

वित्त मंत्री ने फिर महंगाई पर अंकुश लगाने में रिजर्व बैंक की भूमिका को अहम बताया और कहा कि उसके द्वारा किए गए उपायों का कुछ प्रभाव हुआ है. लेकिन अभी पूरा असर दिखना बाकी है. बता दें कि मार्च 2010 से केंद्रीय बैंक नीतिगत ब्याज दरों को 11 बार बढ़ा चुका है.
इस महीने की 16 तारीख को वह फिर इनकी समीक्षा करेगा. पर इसका असर महंगाई पर कितना पड़ेगा यह कहना मुश्किल है. फिलहाल यह तय है कि बार-बार बढ़ती ब्याज दरों के कारण विकास दर पर असर जरूर पड़ रहा है.

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में आर्थिक विकास की दर 7.7 प्रतिशत पर सिमट गई है. इसमें औद्योगिक विकास की धीमी रफ्तार ने बड़ी भूमिका निभाई है. विकास की यह दर पिछली छह तिमाहियों में सबसे कम है.

लिहाजा महंगा कर्ज औद्योगिक रफ्तार को आगे भी धीमा करेगा. विशेषज्ञों के मुताबिक महंगे कर्ज के कारण निवेश गतिविधियां घटने से चालू वित्त वर्ष में विकास की दर 7 प्रतिशत तक पहुंच सकती है. जबकि वित्त वर्ष 2011-12 के लिए सरकार ने 9 प्रतिशत की विकास दर का लक्ष्य रखा है.

Related Posts: