न सिर्फ राजधानी भोपाल बल्कि राज्य के हर छोटे-बड़े शहर में सडक़ चलते लड़कियों व महिलाओं पर फब्तियां कसना लोगों को पुरुषार्थ व एडवेन्चर लगने लगा है.

कुछ दिनों पूर्व भोपाल में एक पेट्रोल पम्प के पास स्कूटर सवार दो लड़कियों के प्रति अभद्रता करने पर पकड़े गये इंजीनियरिंग के दो छात्रों ने यह कहा कि उन्हें लडक़ी ने पलट कर जवाब दे दिया था इसलिए उन्होंने उनका और ज्यादा पीछा कर परेशान किया. इस मानसिकता का यही अर्थ है कि लड़कियों पर फब्ती कसी जाए तो उन्हें गुस्सा नहीं आना चाहिए बल्कि चुप रहना चाहिये.

विशाल मेगा मार्ट के सामने भी लडक़ी पर फब्ती कसी गयी और प्रतिकार करने पर उस पर हमले का प्रयास किया गया. अब छेड़छाड़ फब्ती तक सीमित नहीं रही बल्कि घातक रूप में हिंसक हो गयी है. राज्य सरकार ने जहां बच्चों के साथ दुष्कर्म के मामले में फांसी देने का प्रावधान किया है उसी तरह लड़कियों पर फब्तियां कसने व हिंसक होने पर आजन्म कारावास की सजा देने का कानून बनना चाहिए.

अब आम लोग यह भी चाहते हैं कि अभी जेलों में सिर्फ बंद रखा जाता है अब वहां चलाये जा रहे लघु काम-धंधे आदि सब बंद कर दिये जाएं और अपराधियों को सार्वजनिक रूप से शारीरिक दंड जिसे हंटरबाजी कहा जाता था फिर शुरू की जाए.

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