पूर्ण आहुति के साथ सोम यज्ञ का हुआ समापन, उमड़ी भक्तों की भीड़

  • राधे-राधे की धुन पर भक्तों ने किया नृत्य

भोपाल,

यज्ञ का तात्पर्य है संगतिकरण, संगठन, हम संघ में रहते हैं साथ-साथ रहते हैं, हम अपनी इन्द्रियों का संगठन करें, मनोभावों का संगठन करें, विचारों का संगठन करें समाज के हर तबके को संगठित कर जोड़ें और जोडक़र समाज प्रदेश व राष्ट्र के चहुंमुखी विकास में जुट जायें.

यह उद्गार दशहरा मैदान में चल रहे सोम यज्ञ के समापन पर व्रजोत्सव महाराज ने व्यक्त करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति से युवा पीढ़ी को जोडऩे इस प्रकार के दिव्य आयोजन आवश्यक हैं और यही यज्ञ का उद्देश्य है. समाज के सभी वर्ग भारतीय संस्कृति, वैदिक संस्कृति, संस्कारों के साथ जुड़ें .

महाराजश्री ने कहा कि हमारी वैदिक संस्कृति में महिला मातृ शक्ति को सर्वोच्च स्थान प्रदान किया गया है. मातृशक्ति का स्थान का महत्व हमारी भारतीय वैदिक शक्ति में इसी से ज्ञात होता है कि सृष्टि में सर्वोत्तम, सर्वोत्कृष्ट व सर्वोच्च प्राचीनतम सोम यज्ञ बिना धर्मपत्नी के नहीं किया जाता. इसके अलावा देव पूजा, पितृ पूजा व अनेक धार्मिक अनुष्ठानों मांगलिक कार्य बिना मातृशक्ति के पूर्ण नहीं होते.

आयोजन समिति के भगवानदास सबनानी व प्रमोद नेमा ने बताया कि गोकुलोत्सव महाराज एवं व्रजोत्सव महाराज के सानिध्य में आयोजित 6 दिवसीय सोम यज्ञ महोत्सव का समापन आज पूर्ण आहूति के साथ सम्पन्न हुआ.

आज चुनरी महोत्सव के दौरान महिलाओं द्वारा चुनरी की साड़ी पहनकर राधे-राधे की संगीतमय स्वरलहरियों के साथ मुरलीवाला ग्रुप के विजय चतुर्वेदी के सुमधुर भजनों के साथ भक्ति नृत्य किये सम्पूर्ण यज्ञ स्थल का पण्डाल कृष्णा की भक्ति में पूरी तरह रम गया.

इस यज्ञ का आयोजन राजधानी में जन कल्याण अच्छी बारिश की कामना के लिए किया गया. लोगों में इसे लेकर काफी उत्साह दिखा तथा हजारों लोगों ने यज्ञ का पुण्य लाभ लिया.
-भगवानदास सबनानी
 आयोजक सोमयज्ञ

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