• 1 अप्रैल 2018 से लागू कर
  • दिया जाएगा यह नया नियम

नई दिल्ली,

इनकम टैक्स रिटर्न में मामूली गलती की वजह से आयकर विभाग के नोटिस का सामना करने वाले लाखों टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत मिलने जा रही है. सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (सीबीडीटी) ने इसकी जानकारी दी.

फॉर्म-16 (एंप्लॉयर के द्वारा) और फॉर्म-26 एएस(इनकम टैक्स विभाग द्वारा प्राप्त किया गया टैक्स क्रेडिट स्टेटमेंट) में मामूली मिसमैच होने पर टैक्सपेयर्स को अब नोटिस नहीं मिलेगा, हालांकि आंकड़ों में बड़ी गड़बड़ी या संदेह पर पहले की तरह ही नोटिस दिया जाएगा.

पहले किसी भी टैक्सपेयर के बैंकों और अन्य फाइनैंशल ट्रांजैक्शंस का डेटा अगर उसके द्वारा आईटीआर में दी गई जानकारी से थोड़ा भी मेल नहीं खाता था तो उसे इनकम टैक्स विभाग की ओर से नोटिस का सामना करना पड़ता था, अब ऐसे ही टैक्सपेयर्स को राहत देने की तैयारी है.

कई बार टैक्सपेयर्स के द्वारा फॉर्म भरने के वक्त अनजाने में आकड़ों में मामूली गड़बड़ी हो जाती है और उन्हें इसकी वजह से काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. ऐसे लोगों को राहत देने के लिए हाल ही लाए गए फाइनैंशल बिल में प्रावधान किया गया है. इसमें फॉर्म-16 (एंप्लॉयर के द्वारा) और फॉर्म-26 एएस(इनकम टैक्स विभाग द्वारा प्राप्त किया गया टैक्स क्रेडिट स्टेटमेंट) में मामूली मिसमैच होने पर लोगों को राहत देने के प्रावधान है.

सुशील चंद्रा के अनुसार 1 अप्रैल 2018 से यह नया नियम लागू कर दिया जाएगा. वर्तमान में आयकर विभाग के बेंगलुरु स्थित सेंट्रल प्रोसेसिंग सेंटर से आंकड़े मिसमैच होन पर आयकरदाताओं को नोटिस जारी कर दिए जाते थे. सुशील चंद्रा के अनुसार आंकड़ों में बड़ा मिसमैच या संदेह होन पर पहले की तरह नोटिस दिया जाता रहेगा.

सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (सीबीडीटी के) चेयरमैन सुशील चंद्रा ने बताया , इस तरह के मामलों में डेटा में मामूली मिसमैच होने पर नोटिस जारी नहीं करने का निर्णय लिया गया है. हम टैक्सपेयर्स पर भरोसा करते हैं और इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग को आसान बनाने का प्रयास कर रहे हैं. इस फैसले से सबसे ज्यादा सैलरीड और छोटे टैक्सपेयर्स को राहत मिलने की उम्मीद की जा रही है.

Related Posts: