दर्द को दर्द नहीं होता यह केवल अमिताभ बच्चन जैसे ही महानायक ही फिल्मो में डायलोग बोल सकते है. वास्तव में देखा जाए तो शरीर में वेदना हर किसी की आम समस्या है. ‘दर्द ‘ भगवान की बहुत ही अनमोल देन है, क्योंकी यदि जीवन भर कभी दर्द ना हो तो, कभी भी हमें सुख का एहसास नहीं होगा, न ही हमें भगवान की जरूरत होगी, पर ऐसा नहीं होता है.

जब भी किसी भी कारणवश बदन दर्द होता है, तो हमें भगवान, माँ बाप याद आते है.     दर्द के समय उई माँ …, हे माँ …, भगवान मुझे दर्द से मुक्ति दिला दो…. आदि डायलॉग सहज ही मुख से निकलते है.   यह दर्द भी दो प्रकार होता है, एक शारीरिक दर्द और दूसरा मानसिक दर्द. शारीरिक दर्द का कारण शरीर पर चोट लगना और मानसिक दर्द का कारण मन का दुखी होना.

शरीर पर चोट या आघात के कारण जो दर्द होता है, वह स्थानिक स्वरुप का होता है किन्तु कभी कभी यह वेदना सम्पूर्ण शरीर में होती है, जिसका कारण कोई बिमारी होता है.आयुर्वेद शास्त्र में बदन दर्द को रोग नहीं माना है, बल्कि यह एक रोग लक्षण मात्र माना है. जिसका कारण वात दोष का असंतुलन होता है. वात व्याधि के पूर्वरूप में शरीर वेदना का उल्लेख है. जैसा की माधव निदान नामक आयुर्वेद ग्रन्थ में वर्णन है ..

भेदस्तोदो अर्तिराक्षेपो मुहुश्चायास एव च 

बदन दर्द का कारण:

मौसम में ठंड का बढऩा, अधिक यात्रा करना, नींद की कमी, अत्यधिक मेहनत का काम, उपरोक्त कारणों से शरीर में स्थित वात दोष प्रक्रूपित होकर शरीर में वेदना होती है.

शरीर दर्द की चिकित्सा:

बिना वात के बदन दर्द नहीं होता है. इसीलिए वात दोष की चिकित्सा करना आवश्यक है. तेल एक सर्वोत्तम वातशामक द्रव्य है, इसीलिए सर्वप्रथम अभ्यंग अर्थात सम्पूर्ण शरीर की हलके हाथ से मसाज करने से बदन दर्द से राहत मिलती है. उसके बाद शरीर की गरम भाप से सिकाई करने से भी लाभ मिलता है, इस विधि को ‘स्वेदन ‘ कहते है. पंचकर्म चिकित्सा में ‘बस्ति ‘ अर्थात गुदा मार्ग से औषधि द्रव्यों को पहुचने से वात दोष शांत होता है.

इसके अतिरिक्त बदन दर्द से राहत हेतु कुछ घरेलू उपाय 

* बदन दर्द का कारण अधूरी नींद हो तो- एक चम्मच अश्वगंधा चूर्ण रात्रि में सोने से पूर्व गरम जल से लेवे.

* सर्दी जुकाम और वायरल से बदन दर्द होने पर- लेमन ग्रास से बाष्प स्वेदन से पसीना आकार बदन दर्द कम होता है.

* पारिजात पत्र का स्वरस एक चम्मच और आर्दक स्वरस एक चम्मच मिलाकर मिश्री के साथ लेने से बदन दर्द में लाभ मिलता है.

* मौसम में ठंड के होनेवाले शरीर वेदना में मेथी के लड्डू का सेवन करने से वात दोष शांत होकर दर्द काम होता है.

* हड्डी दर्द में बबूल बीज का चूर्ण शहद के साथ लेने से दर्द काम होता है.

इसीलिए उपरोक्त घरेलू उपचार से बदन दर्द से बचना बहुत ही लाभदायक होता है, क्यूंकि आमतौर पर देखा जाता है कि किसी भी छोटे से दर्द होने पर लोग दर्द नाशक (पेन किलर ) टेबलेट लेते है , जिनका ज्यादा मात्रा एवं अधिक समय तक प्रयोग करने से शरीर के लिए नुकसानदायक होता है. अत: बदन दर्द के मूल कारण और मूल रोग को जानकर उसकी चिकित्सा करना चाहिए.

एम .डी .( आयुर्वेद ), पी.एच.डी.(स्कॉलर),एसोसिएट प्रोफेसर, आयुर्वेद चिकित्सक ,मोबाइल 9407486808

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