इन्दौर. 27 सितंबर. मौजूदा खरीफ सीजन में मूंगफली के रकबे में आई गिरावट से इसके उत्पादन में संभावित गिरावट को लेकर चिंता बढ़ गई हैं. कहा जा रहा है कि इस वजह से आने वाले दिनों में खाद्य तेल की उपलब्धता पर असर पड़ेगा. कारोबारियों को डर है कि इस साल मूंगफली के उत्पादन में करीब 15 फीसदी की गिरावट आएगी और यह पिछले साल के 16 लाख टन के मुकाबले महज 12 से 13 लाख टन रह जाएगा.

इस सीजन में तेल उत्पादन के लिए मूंगफली की कम उपलब्धता से साल के दौरान मूंगफली तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। इंडियन ऑयलसीड ऐंड प्रोड्यूस एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (आईओपीईपीसी) के अनुसार कम बुआई के चलते इस साल देश में मूंगफली के उत्पादन में 10-15 फीसदी की गिरावट के आसार हैं। इसके अतिरिक्त बुआई क्षेत्र में खराब मौसम के चलते भी उत्पादन पर असर पड़ सकता है।

कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 12 सितंबर तक गुजरात में 14.3 लाख हेक्टेयर में मूंगफली की बुआई हो चुकी है, जो पिछले साल की समान अवधि के 16.7 लाख हेक्टेयर के मुकाबले कम है। देश भर में 15 सितंबर तक कुल 43.2 लाख हेक्टेयर में मूंगफली की बुआई हुई है, जो पिछले साल के 49.3 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 6 फीसदी कम है।
उद्योग के अनुमान के मुताबिक, मूंगफली के कुल उत्पादन का 40 फीसदी का इस्तेमाल पेराई में होता है। पिछले साल हालांकि कुल उत्पादन के 30-32 फीसदी हिस्से की ही पेराई हुई थी क्योंकि ज्यादातर स्टॉक का इस्तेमाल मूंगफली व इससे बनेउत्पादों के उपभोग में हुआ था। इस बीच, मिल मालिकों को आशंका है कि मूंगफली के रकबे में गिरावट की वजह से तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।

कारोबारी कह रहे हैं कि रकबे में गिरावट से उत्पादन घटेगा और निश्चित तौर पर लंबी अवधि में मूंगफली तेल की कीमतों पर इसका असर पड़ेगाअगले तेल वर्ष में मूंगफली तेल की कीमतें 2000 रुपये प्रति 15 किलोग्राम को पार कर सकती हैं। इस बात की संभावना कम है कि कीमतें 1500 रुपये प्रति टिन से नीचे आए। मौजूदा समय में मूंगफली तेल की कीमतें ज्यादा हैं और 1665-1670 रुपये प्रति टिन पर उपलब्ध है। यहां इस बात का उल्लेख जरूरी है कि पेराई के लिए मूंगफली की किल्लत के चलते अगस्त में मूंगफली तेल की कीमतें 1720 रुपये प्रति 15 किलोग्राम पर पहुंच गई थीं.

पिछले साल खरीफ व रबी दोनों सीजन में मूंगफली का उत्पादन बढ़ा था, लेकिन ज्यादा स्टॉक का इस्तेमाल मूंगफली व इससे बने उत्पाद के उपभोग में हो गया, लिहाजा मिलों को पेराई के लिए मूंगफली की कमी का सामना करना पड़ा.समझा जाता है कि निर्यात और खाने में इस्तेमाल होने वाले मूंगफली की खपत से भारत में मूंगफली की तेल की भविष्य की कीमतें तय होंगी. अगर निर्यात में इजाफा होता है तो कीमतें निश्चित तौर पर बढ़ेंगी.

फरवरी के बाद मूंगफली तेल की कीमतें बढऩी शुरू होंगी.

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