राज्य की चौदहवीं विधानसभा के दूसरे बजट सत्र का उद्घाटन करते हुए राज्यपाल श्री रामनरेश यादव ने अपने अभिभाषण में यह स्थापित किया है कि प्रदेश निरन्तर प्रगति के पथ पर जा रहा है और तुलना में अपनी श्रेष्ठïता भी सिद्ध की है.
राज्य वित्तीय प्रबंधन में इतना सशक्त है कि पिछले 10 सालों में उसने ओवर ड्राफ्ट नहीं लिया. वर्ष 2003-04 में जहां 4,475 करोड़ रुपयों का राजस्व घाटा था वहीं इस वर्ष 2015-16 में 4,479 करोड़ रुपयों का राजस्ïव आधिक्य अनुमानित है. न सिर्फ संसद बल्कि राज्य विधानसभाओं में ही यह व्याधि भी संक्रामक रोग की तरह ही फैल चुकी है कि हंगामे व हल्ला की स्थिति राज्यपाल के अभिभाषण में ही प्रारंभ की जाए. अब सदन की या राज्यपाल की मर्यादा का प्रश्न ही नहीं है. आज मध्यप्रदेश के साथ-साथ उत्तरप्रदेश की विधानसभा का भी बजट सत्र प्रारंभ हुआ. दोनों ही जगह राज्यपाल के अभिभाषणों पर भारी शोर-शराबा और वाक आऊट हुए. अब सभी यह जान गये हैं कि ”हंगामा है क्यों बरपाÓÓ. मध्यप्रदेश में कांग्रेस विपक्ष ने व्यापमं में मुख्यमंत्री श्री चौहान की लिप्तता पर हंगामा और वाक आऊट कर दिया. अब यह परम्परा हो गयी है कुछ भी हो अभिभाषण पढ़ा ही जायेगा. कभी यह खानापूरी भी हुई है कि लिखित भाषण का पहला व आखरी पैरा पढ़ दिया गया और घोषणा कर दी कि इसे ”पढ़ा माना जाए.ÓÓ
प्रगति के सोपान बनाते हुए राज्यपाल ने सदन को बताया कि वर्ष 2003-04 में राज्य का घरेलू उत्पाद जहां 1 लाख दो हजार 839 करोड़ था, वहीं अब इन 10 सालों में चार गुना बढ़कर 4 लाख 80 हजार 900 करोड़ रुपये अनुमानित है. पिछले वित्त वर्ष में राज्य के सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 11.08 रही. राज्य के पून्जीगत व्यय के प्रतिशत में भी लगातार वृद्धि हो रही है. वर्ष 2006-07 से राजकोषीय घाटा भी सीमा में है.

जैसे देश में आर्थिक आधार व गणना का वर्ष 2012 कर दिया गया है, उसी तरह मध्यप्रदेश में सरकार की प्रगति का आधार वर्ष 2003-04 बन चुका है क्योंकि इससे पहले 10 सालों तक कांग्रेस की दिग्विजय सिंह की सरकार दो टर्म में रही और इन दिनों भारतीय जनता पार्टी की सरकार 15 साल के शासन के लिये तीसरे टर्म में चल रही है. तीसरा टर्म श्री चौहान को बड़ा फलदायी इस मामले में रहा कि पहले दो टर्म में उन्हें केन्द्र में कांग्रेस नेतृत्व की दो टर्म की यूपीए सरकार से वास्ता पड़ता था और वे अपनी हर अलाबला केन्द्र सरकार की पक्षपात की नीति पर थोप देते थे, लेकिन इस तीसरे टर्म में उन्हें केन्द्र में उन्हीं की भारतीय जनता पार्टी की मोदी सरकार मिली है. अब पिछला ‘पक्षपातÓ इस बार ‘पक्षÓ बन गया है. राज्य में प्रगति के सोपान में गति भी आयेगी.

मोदी जी के जनधन योजना में मध्यप्रदेश में बगैर बैंक खाते वाले 49 लाख 47 हजार परिवारों का बैंक खाता खोल कर प्रदेश के शत-प्रतिशत परिवारों को बैंक से जोड़ा गया है और 1 करोड़ 41 हजार खाते खोले जा चुके हैं. मध्यप्रदेश जैविक खेती के उत्पादन में देश में सबसे आगे है.

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