गर्मी बढ़ते ही कई इलाकों में गहराने लगा पानी संकट

नवभारत न्यूज भोपाल,

शहर में भीषण गर्मी का दौर आते ही शहर में पेयजल संकट गहनाने लगा है. खासकर उन क्षेत्रों में जहां पानी की डिमांड बढ़ते ही अधिक क्षमता से जलापूर्ति करने के कारण पाइप लाइने फूटने की समस्याएं बढऩे लगी है.

ऐसा ही नजरा शहर के अलग-अलग इलाकों में देखने को मिल रहा है. जहां पाइप लाइन के लीकेज के कारण नियमित जलापूर्ति बिगडऩे लगी है. इन्ही लीकेजों के कारण लोगों को पानी का संकट सताने लगा है.

निगम के पास पर्याप्त पानी तो है मगर वितरण व्यवस्था गड़बड़ाने से जलापूर्ति व्यवस्थित नही हो पा रही है. इसके चलते पिछले दो सप्ताह से लीकेज समस्या के कारण पुराने और नये शहर में जलापूर्ति प्रभावित हुई है.प्रभावित क्षेत्रों में लोग पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हो रहे है.अगर ऐसे ही लीकेज समस्या बनी रही तो आने वाली भीषण गर्मी के दौरान जलसंकट और गहराने लगेगा.

जानकारी के मुताबिक बीते 22 मार्च को निगम ने कोलार पाइप लाइन की मुख्य ग्रेविटी लाइन में शाहपुरा, चूना भट्टी, मदर टेरसा स्कूल और अन्य दो स्थानों पर बड़े लीकेज हुए थे. इस कारण निगम को तीन दिन सप्लाई बंद करना पड़ी.

इस दौरान निगम के जलकार्य अमले ने दिन रात मेहनत कर शाहपुरा, चूना भट्टी का लीकेज सुधार और एकांत पार्क के पास वॉल्व को बदला तथा बोर्ड ऑफिस चौराहे के पास लीकेज मरम्मत किया.कोलार लाइन के लीकेज व वाल्ब बदलने पर करीब 10 लाख व्यय किये. फिर भी कई घरों में पानी उच्च दाब के बाद भी नहीं पहुंच पा रहा है.

संकटग्रस्त इलाकोंं में टैंकर से मिलेगा पानी

निगम प्रशासन शहर के 17 जोन में संकटग्रस्त क्षेत्रों में टैंकरों से पानी पहुंचाएगा.इसके लिए निगम ने 50 लाख रूपये के व्यवय का प्रावधान अनुमानित किया है. इसकी तैयारी भी पूरी हो गई है. इस कार्य के लिए निजी टैंकर अनुबंध किए जाएंगे.बताया जा रहा है कि टैंकर से जलापूर्ति की स्थिति जून माह में बनेगी. बारिश होने के बाद स्थिति में सुधार होगा.

कोलार और होशंगाबाद रोड क्षेत्र में स्थिति ज्यादा खराब

जोन 18 और 19 का अधिकांश हिस्सा पहले से ही टैंकरों पर निर्भर हैं. इसमें होशंगाबाद रोड, मिसरोद, कोलार क्षेत्र शामिल हैं.

शहर में 104 एमजीडी पानी आता है

शहर में कोलार परियोजना,नर्मदा जल आवर्धन योजना,और बड़ी झील समेत प्रतिदिन 104 एमजीडी पानी आता है.जो पर्याप्त है. लेकिन कुछ स्थानों पर लीकेजों में बहकर तो कुछ जगह कम दबाव के कारण पानी बर्बाद हो जाता है.जल वितरण संरचना की खामियों के चलते कई इलाकों में जलसंकट आए दिन हो रहा है.

नये लीकेज को सुधारने की तैयारी

निगम सूत्रों के मुताबिक हाल ही में कोलार की मुख्य ग्रीवेटि लाइन में कजलीखेड़ा के पास एक नया लीकेज हो गया है. साथ ही एकांत पार्क के पास बदले गये वाल्व की भी मरम्मत के दौरान की गई वेल्डिंग ठीक से नही होने के कारण यहां से रोजना हजारों गैलन पानी बर्बाद हो रहा है.

अब फिर से पानी की बर्बादी रोकने के लिए नए लीकेज सुधार व वाल्व की पुन:मरम्मत के लिए निगम को शटडाउन लेना होगा. फिलहाल निगम ने इसके लिए अभी तिथि घोषित नही की है. यह कार्य जल्द ही किया जाएगा.जिससे अब फिर जनता को पानी के लिए परेशान होना पड़ेगा.

लीकेज के चलते 15 एमजीडी पानी बर्बाद होता है

शहर में रोजाना करीब 15 एमजीडी पानी की बर्बादी होती है.यह बर्बादी कोलार,नर्मदा जल परियोजना, बड़ी झील की जलवितरण लाइनों से होती है. बताया जाता है कि एक एमजीडी (4546090 लीटर) पानी से साढ़ेे 33 हजार लोगों की आपूर्ति होती है. लीकेज से बर्बाद हो इस पानी की बचत की जाए तो प्रति वर्ष 18 करोड़ 41 लाख लोगों की प्यास बुझाई जा सकती है.

क्षमता से ज्यादा पानी लेने के कारण कोलार पाइप लाइन में लीकेज की समस्या नहीं हो रही है. पुराने शहर में हुए लीकेज कुछ इलाकों में दिक्कत हुई थी. लीकेज सुधार के चलते भी थोड़ी परेशान हुई थी. नये लीकेज की मुझे जानकारी नही है. अगर लीकेज है तो सुधरवा लेंगे.
-एमपी सिंह,
 प्रभारी आयुक्त ननि भोपाल

लीकेज समस्या से थोड़ी परेशानी हुई थी. मगर अब शहर के सभी क्षेत्रों में पानी निरंतर सप्लाई हो रहा है. जहां तक लीकेज मरम्मत की बात है तो इस समय सभी जगह के लीकेज सुधर गये है. नये लीकेज की मुझे जानकारी नही है.दिखवालेंगे.
-अविनाश श्रीवास्तव, उपयंत्री दृव्य
 जलकार्य विभाग,ननि भोपाल

 

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