याचिका समिति ने दिया 15 दिन का समय

नवभारत न्यूज भोपाल,

मप्र बुन्देलखण्ड पैकज मे हुये घोटाले की जाच रिपोर्ट अब विधानसभा सचिवालय ने तलब किया है.शिकायर्ता पवनघुवारा ने राज्य सरकार द्वारा घोटाले की जांच रिपोर्ट एवं दोषियों पर विभागीय कार्यवाही सम्बन्धी जानकारी नहीं देने पर विधानसभा सचिवालय मे आवश्यक कार्यवाही हेतु गुहार लगाई गई थी.

इसको संज्ञान में लेकर विधानसभा याचिका समिति ने सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजकर बुन्देलखण्ड पैकज घोटाले की रिपोर्ट 15 दिन में पेश करने को कहा है. यहां बता दें कि बुदेलखंड के सूखे से निपटने के स्थाई हल के लिये वर्ष 2008-2009 में तत्कालीन केन्द्र की यूपीए सरकार ने बुंदेलखंड पैकेज के रूप में मध्यप्रदेश को 3860 करोड रूपये आंबटित किये थे.

लेकिन जांच में पाया गया कि जलसंसाधन विभाग की 880 करोड की योजनाये भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई. ग्रामीण यांत्रिकी विभाग के 210 करोड़ की लागत से बनाये गये 350 स्टापडेम भी गिरोहबंद लूट के प्रमाण के तौर पर नजर आए. ग्रामीण अंचलों में पशुधन के आधार पर लोगों को सुदृढ़ करने के लिये प्रावधान था.

पशुपालन विभाग में जांच में हुई जांच में तकनीकी सतर्कता महालेखाकार परीक्षक ने पाया कि, जिस राशि को हितग्राहियो के खातो में जमा होना था वो राशि पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियो ने स्वयं के खातो में जमा कर ली. उद्यानिकी विभाग भी 66 करोड रूपये में किसानों का उद्धार नहीं कर पाया. वन विभाग का भ्रष्टाचार विजीलेंस ने उजागर किया जहाँ वाटरशंड की आड में पूरी राशि ही हजम कर गये.

कमोबेश यही स्थिति कृषि विभाग को मिली 574.50 करोड़ रुपये की उपयोग राशि में भी घोटाले की कहानी ही निकलकर सामने आई है. जबकि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकीय विभाग द्वारा 6 जिलों में 100 करोड़ की लागत से तैयार की गई 1287 नलजल योजनाओं की उपयोगिता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि 997 योजनाएं शुरू ही नहीं हो पाईं.

अब यह है स्थिति

शिकायत कर्ता की मानें तो प्रदेश सरकार ने सीटीआई की जांच रिपोर्ट पर काम कर दोषियों को न तो चिन्हित करने का प्रयास किया और न ही संबंधितों के खिलाफ कोई कार्यवाई ही की. लिहाजा परिणाम यह रहा कि पहले ही जहां कई अफसर सेवानिवृत्ति हो चुके वही दूसरी ओर मामले को दबाएं रखने से दोषी अफसर भी कार्यवाई से बचे हुए है.

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