गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागूं पाय।
बलिहारी गुरु आपकी गोविंद दियो दिखाय॥

इस दोहे में शिक्षक एवं शिक्षा दोनों की महत्ता बयान की गई है. गुरु यानि शिक्षक ने गोविंद दिखाया यानि शिक्षा दी, गोविंद के बारे में. इसलिये ज्ञान प्राप्त करना जीवन का एक जरूरी कार्य है. इसलिये शिक्षा का लोकव्यापीकरण होना आवश्यक है. किसी भी कार्य का लोकव्यापीकरण करना होता है तो उसके लिए संसाधनों की जरूरत होती है. यहां शिक्षा के लिए बिल्डिंग, शिक्षक, परिवहन इत्यादि संसाधन महत्वपूर्ण हैं. संसाधनों को जुटाने के लिये सबसे ज्यादा जरूरी है फायनेंस.

पहले हमारे देश में सिर्फ सरकारी विद्यालय थे. सभी वर्ग के छात्र इन्हीं विद्यालयों में पढ़ते थे. जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ी ज्यादा विद्यालय, ज्यादा शिक्षकों की जरूरत पड़ी. तब हिंदू समाज, मुस्लिम समाज, ईसाई समाज की स्वयंसेवी संस्थाओं ने कार्य को आगे बढ़ाया. देश के सभी शहरों में इन्हीं संस्थाओं ने बेहतर संसाधनों एवं शिक्षकों को रोजगार उपलब्ध कराते हुए विद्यालय खोले एवं छात्रों को शिक्षा दे पाये.

जब बेहतर विद्यालय खुल रहे थे, वहीं सरकारी विद्यालयों का पतन हो रहा था. संसाधनों की हालत खस्ता हो रही थी. शिक्षक भी पढ़ाने में रुचि नहीं ले रहे थे जिससे पढ़ाई एवं छात्रों का नुकसान हो रहा था. इन कारणों से अभिजात्य वर्ग ने अपने बच्चों को स्वयंसेवी संस्था के विद्यालयों में डालना शुरू कर दिया. इससे विद्यालयों की कमी पडऩे लगी. इस कमी को औद्योगिक घरानों एवं व्यवसायियों ने अपार्चुनिटी माना एवं अपने लगातार बेहतर संसाधन, बिल्डिंग, शिक्षक इत्यादि लगाकर अत्याधुनिक विद्यालय बनाये.

यहीं से शुरू हुआ शिक्षा को व्यवसाय बनाने का दौर. डिमांड सप्लाई आधारित इकोनॉमी ने इसे बढ़ावा दिया. जनसंख्या बढ़ रही थी, छात्र ज्यादा आ रहे थे पर उनके लिये विद्यालय की संख्या पर्याप्त नहीं थी इसीलिये यह जरूरी हो गया था कि विद्यालय बढ़ाये जायें जिससे सभी छात्रों को एडमीशन मिले. व्यवसायी इसमें कूदे. जाहिर है व्यवसायी हैं तो लाभ ही कमाने आये हैं. पर एक दूसरा नजरिया यह भी है कि अगर यह विद्यालय नहीं बनते तो छात्र शिक्षा पाने से वंचित रह जाते. जो छात्र अनपढ़ रह जाते उनका भविष्य खराब हो जाता. न उन्हें ज्ञान मिलता न वह व्यवसाय कर पाते न उन्हें बेहतर नौकरियां मिलतीं. हमारी युवा पीढ़ी बेकार हो जाती, जिससे देश को भी नुकसान होता.

पर यहां अंत में यह जरूर कहूंगा कि शिक्षा के व्यवसायीकरण से देश को लाभ हुआ पर जो फीस बढ़ाकर लाभ कमाने की प्रवृत्ति हो रही है उस पर नियंत्रण रखना जरूरी है जिससे छात्र बेहतर शिक्षा से फीस के कारण वंचित नहीं रह जाएं.

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