शिक्षा आज एक व्यवसाय बन चुका है. व्यवसाय के अस्तित्व के लिये लाभ अनिवार्य है. फिर जब पूंजी निवेश कर कमाने के लिये कोई इस क्षेत्र में आएगा उसका लाभ और लालच से बचना काजल की कोठरी में बेदाग निकलना जैसा अपवाद तो हो सकता है पर नियम नहीं. यही कारण है कि आज मासूमों के प्ले स्कूल हो, या स्कूल अथवा कॉलेज, अधिकांश जगह अनचाहा माहौल बना हुआ है.

जगह-जगह प्रायवेट संस्थान ज्यादा से ज्यादा लाभ कमाने में लगे हैं. हर साल फीस बढ़ा दी जाती है. लाभ कमाने के लिये महंगी यूनीफार्म और किताबें खरीदवाई जा रही हैं.एडमिशन फीस के साथ बिल्डिंग फंड, इवेंट फंड, इत्यादि जोड़ दिया जाता है. जिससे पालकों पर बोझ बढ़ जाता है. कम सीट होने का हवाला देकर डोनेशन भी पालकों से लिया जाता है.इसे लेकर शिकायतें मिल रही हैं. कहीं फीस नहीं भरने के कारण बच्चे प्रताडि़त हो रहे हैं. कहीं पैसे के लिये मार्कशीटें और डिग्रियां बेची जा रही हैं और पैसे से इन्हें खरीदा जा रहा है.

यह सही है कि शिक्षा में सभी ऐसे ही अवांछनीय लोग नहीं हैं. लेकिन अपवाद में ही सही कहीं कहीं तो है, इससे कैसे इंकार कर सकते हैं. शिक्षा के लिये सरकार तो स्कूल कालेज चलाती ही है, समाज सेवी और कई समाज सामूहिक रूप से मिलकर स्कूल चला रहे थे. क्रिश्चियन स्कूल, आर्यसमाज के स्कूल, इसका उदाहरण रहे हैं. उनका ध्येय समाजसेवा था. लाभ की आकांक्षा नहीं. लेकिन आज अपवाद छोड़ दें तो लोग शिक्षा से पैसा बना रहे हैं.

सर्वे रिपोर्ट्स बताती है कि शिक्षा कालेधन को खपाने के सबसे बड़े ठिकानों में से एक है. देश और समाज के हित में शिक्षा को अवांछनीय लोगों से बचाना जरूरी हो गया है. शिक्षा का अधिकार एक संवैधानिक अधिकार बन चुका है. आज शिक्षा की चाहत ऐसी चीज बन गई है कि उसकी मांग आज अकेली सरकार पूरा नहीं कर सकती.

प्रायवेट सेक्टर की भागीदारी आवश्यक ही नहीं अनिवार्यता बन चुकी है. ऐसे में यह जरूरी हो गया है कि सरकार सख्ती से कदम उठाए और गलत लोगों और संस्थाओं पर अंकुश लगाए. बाल अधिकार आयोग आदि इस दिशा में सक्रिय हैं. फिर भी पेरेंट्स एसोसिएशन, सामाजिक संगठनों को भी अंकुश रखने में अहम भूमिका निभानी होगी. तभी शिक्षा को लाभ के लालच और काली पूंजी के पंजे से बचाया जा सकेगा.

बच्चे और युवा देश का भविष्य हैं, इन्हें योग्य बनाना है, देश का भविष्य गढना है तो शिक्षा को अवांछित लोगों के चंगुल से निकाल कर सही हाथों में सौंपना ही होगा. इसके लिये सरकार को आवश्यक कदम उठाने होंगे जिससे बेहतर संस्थान तो खुलें साथ ही लूट पर अंकुश भी लगे.

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