किसी भी मुख्यमंत्री के लिए यह गर्व की बात है कि वह लगातार तीन टर्म की राज्य सरकार में 12 साल का कार्यकाल बिना किसी राजनैतिक बाधा के साथ पूरा कर ले और यह भी प्रतीत हो कि वह शासन के चौथे टर्म के लिए पूरी तरह तैयार है. वे किसान पृष्ठभूमि के गांव में निवास करने वाले हैं.

उनकी विनम्रता व मिलनसारी ने उन्हें सर्वप्रिय बना दिया है. राज्य में भारतीय जनता पार्टी के शासन में मूल रूप से साध्वी उमा भारती मुख्यमंत्री बनी थीं लेकिन राजनैतिक-कानूनी कारणों से पद छोडऩा पड़ा और श्री बाबूलाल गौर अंतरिम मुख्यमंत्री के रूप में सामने आये.

इसके बाद पार्टी ने श्री शिवराजसिंह चौहान को यहां मुख्यमंत्री बना कर भेजा. वे उस समय विदिशा से लोकसभा में संसद सदस्य थे. श्री चौहान ने राज्य में विकास के कार्यों को बहुत बढ़ाया. नयी-नयी योजनाएं लागू की गईं.

सभी धर्मों के वृद्धजनों को उनकी श्रद्धा व मंशा के अनुसार अवसर पाने के लिए अखिल भारतीय स्तर की तीर्थयात्राएं आयोजित की. इसमें उनकी सुख सुविधा का बहुत ही उत्कृष्ट ध्यान रखा जाता है. देश में यह उनकी विलक्षण योजना है.

किसानमुखी होने के नाते वे किसानों के हित में सभी कुछ करने को तैयार रहते हैं. प्याज की बहुतायत पैदावार से किसान तबाह हो रहे थे- श्री चौहान ने प्याज खरीद ली उसे फेंकना भी पड़ा लेकिन किसान बरबाद होने से बच गया. हालांकि इसमें राज्य का करोड़ों रुपया भी प्याज के साथ व्यर्थ हो गया.

इतने लंबे शासनकाल में कुछ अप्रिय भी हो जाता है. उसमें व्यापमं घोटाला व हाल ही में भोपाल में एक छात्रा के साथ निर्भया कांड जैसी घटना हो जाना भी है. लेकिन कुल मिलाकर श्री चौहान का 12 वर्षीय कार्यकाल राज्य के चहुंमुखी विकास का रहा. तीर्थ यात्रा की तरह श्री चौहान की किसान हित की भावान्तर योजना भी अद्भुत है. अन्य राज्य भी इसका अनुसरण करने जा रहे हैं.

गंगा एक्शन प्लान में गंगा जब साफ होगी तब होगी लेकिन श्री चौहान ने नर्र्मदा एक्शन प्लान लागू कर दिया. उसी तरह तमाम सरकारें अभी तक नदी जोड़ योजनाओं पर बातों में ही उलझती रही लेकिन श्री चौहान ने नर्मदा-क्षिप्रा को जोड़कर भारत में उसकी शुरूआत अपने दम पर ही कर दी. अब केंद्र सरकार मध्यप्रदेश में ही केन-बेतवा लिंक योजना लागू करने जा रही है.

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